कलेक्टर  रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के चार गांवों के स्वैच्छिक विस्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति

जुगाड़ एवं देवझरअमली के हितग्राहियों का अंतिम सत्यापन 15 दिनों में होगा पूर्ण

गरियाबंद – उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की प्रक्रिया के क्रियान्वयन के लिए गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति की द्वितीय बैठक गुरुवार को कलेक्टर  रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में स्वैच्छिक विस्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ग्राम जुगाड़ एवं देवझरअमली के पुनर्वास हेतु वैकल्पिक भूमि का अंतिम रूप से चयन किया गया। समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि आगामी 15 दिनों के भीतर इन दोनों ग्रामों के पात्र हितग्राही परिवारों की पहचान एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। इस अवधि में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी सम्मिलित रहेगी, जिसके अंतर्गत ग्रामीण अपने दावे, आपत्तियां एवं अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके पश्चात पात्र हितग्राहियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। बैठक में ग्राम ओढ एवं अमलोर में स्वैच्छिक विस्थापन के संबंध में ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इन दोनों ग्रामों के विस्थापन हेतु भी वैकल्पिक भूमि का चयन अंतिम रूप से कर लिया गया है। इस प्रकार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में चार ग्रामों के स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बैठक में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक  वरुण जैन सहित विभागीय अधिकारी एवं प्रभावित गांव के गणमान्य नागरिक गण शामिल रहे।

हाथी कॉरिडोर से बाहर ही होगा पुनर्वास स्थलों का चयन –

पुनर्वास स्थलों के वैज्ञानिक एवं दूरदर्शितापूर्ण चयन पर जोर देते हुए कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विस्थापन हेतु आवंटित वैकल्पिक भूमि किसी भी स्थिति में हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विस्थापन का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को वर्तमान निवास स्थल से स्थानांतरित करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित एवं बेहतर जीवन परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी है। साथ ही यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नए पुनर्वास स्थलों पर भविष्य में मानव-हाथी द्वंद्व अथवा अन्य मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो।

कलेक्टर ने राजस्व एवं वन विभाग को प्रक्रिया में तेजी लाने के दिए निर्देश –

कलेक्टर श्री शर्मा ने राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ विस्थापन से संबंधित सभी लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों में अनावश्यक विलंब एवं लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता, लापरवाही अथवा जानबूझकर रुचि नहीं लेने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में हितग्राहियों की पहचान एवं सत्यापन, वन अधिकारों एवं पात्रताओं का निर्धारण, पुनर्वास हेतु चयनित भूमि की उपलब्धता एवं आवश्यक स्वीकृतियों तथा पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भी समीक्षा की गई।

उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की प्रक्रिया राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीणों की स्वैच्छिक सहमति, सूचित सहमति, पारदर्शिता तथा वनवासी समुदायों के अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जिला प्रशासन एवं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन का प्रयास है कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल परिवारों के भौतिक स्थानांतरण तक सीमित न रहे, बल्कि नए पुनर्वास स्थलों पर सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका एवं अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास भी सुनिश्चित किया जाए। यह बैठक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव एवं प्राकृतिक आवास संरक्षण के साथ-साथ वनवासी समुदायों के सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।