कांकेर – धान की फसल में पेनिकल माइट (मकड़ी) एवं बेक्डली झुलसा रोग का प्रकोप से उत्पादन एवं गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार के आरक्षण के लिए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करना, विविधताओं का उपयोग करना और समय पर प्रबंधन उपाय की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर के विषय वस्तु विशेषज्ञ (पौध रोग विज्ञान) उपेन्द्र कुमार नाग ने किसानों को इन समस्याओं के समाधान की पहचान कर समय पर नियंत्रण के उपाय की जानकारी दी है।
पेनिकल माइट के लक्षण एवं हानि
पेनिकल माइट के प्रकोप से धान की पर्णच्छद (लीफ शीथ) का रंग भूरा जमाव प्रतीत होता है और टिक पर छोटे-छोटे भूरे रंग के आंकड़े दिखाई देते हैं। अधिक प्रकोप होने से ड्रोन मानक आकार के हो जाते हैं। दानों में दूध भराव नहीं होने से वे पोचे या बदरा रह जाते हैं। कई बार डैन तोते की चोंच जैसे आकार के दिखाई देते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘पार्ट बाइकिंग’ कहा जाता है। यह सूक्ष्म मकड़ी धान की पत्ती के अंदर के भाग में छिपकर रस निकलता है। इसके कारण पर्णच्छद पर पियानो रंग के या भूरे-चॉकलेटी चटकते बन जाते हैं। फिल्म के बाहरी हिस्से को लेकर इसकी उपस्थिति की पहचान की जा सकती है। दानों में दूध की मंजूरी की स्थिति में इसका प्रकोप अधिक नुकसान पहुंचाता है। प्रभावित स्थलों पर चट्टानों का संक्रमण भी हो सकता है, जिससे दानों का विकास बाधित होता है और बालियों में बदरा दानों की संख्या में वृद्धि होती है।
पेनिकल माइट के प्रबंधन के उपाय
किसानों को पेनिकल माइट के नियंत्रण के लिए सलाह दी गई है कि नत्रजन मानक सहित सभी मानक मात्रा में उपयोग करें। बीजारोपण और तकनीशियन के बीच लगभग 15 से 15 की दूरी बनाए रखें। फसलों की कटाई के बाद आदिवासियों को मिट्टी में मिला दिया गया। लगातार धान की फसल लेने के बजाय फसल चक्र। दलहन एवं तिलहनी को शामिल किया जा सकता है। फ़सल की नियमित निगरानी करें तथा पर्नचैड को फ़िल्म की उपस्थिति की जाँच करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए पंजीकृत एवं सुपरमार्केट या मैटीनॉक का ही उपयोग करें। औषधि का चयन, मात्रा और संरचना का समय, स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल के अनुसार निर्धारित करें।
गर्दन झुलसा रोग के लक्षण
धान में झुलसा रोग का संक्रमण रेस्टाइन, पर्णच्छद, तने के पेट वाले हिस्से, बाली की गर्दन तथा बाली के अन्य रोग दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में छोटे पर छोटे, लगभग 1 से 3 गोदामों की हिस्सेदारी है। ये धब्बे आँख या नाव के आकार के होते हैं। इनका मध्य भाग धूसर और किनारा भूरा या गाजरी-भूरे रंग के होते हैं। तने और बाली की गर्दन पर संक्रमण होने से नुकसान अधिक होता है। बाली के मुखिया से प्रभावित होकर दानों में आधा या बिल्कुल भी भरवा नहीं हो पाता है, जिससे बालियां बदरा रह जाती हैं। कई बालियानों के मसाले से पहले ही रेलवे स्टेशन टूट गए हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दाढ़ी झुलसा रोग का प्रबंधन
माथे पर झुलसा रोग की रोकथाम के लिए रोग प्रतिरोधी या सहनशील संतुलन का चयन सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। किसानों को धान की कर्ममासुरी, दन्तेश्वरी, इंदिरा सोना एवं ताड़ी-64 जैसे संबंधों में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से उपयुक्तता की पुष्टि कर खेती करने की सलाह दी गई है। रोग के नियंत्रण के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत $ डेफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत जैसे कीटनाशक का उल्लेख किया गया है। हालाँकि, किसी भी दवा के उपयोग से पहले धान में संबंधित रोग के लिए उसका वर्तमान रजिस्टर, लेबल पर दी गई मात्रा, अवधि और स्थानीय कृषि विभाग की पुष्टि की पुष्टि करना आवश्यक है। इंजीनियर द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के साथ ही करें और अलग-अलग औषधियों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के न लें।
किसानों से नियमित पर्यवेक्षण की अपील
कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर के विषय वस्तु विशेषज्ञ (पौध रोग विज्ञान) उपेन्द्र कुमार नाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान की फसल में पेनिकल माइट एवं झुलसा रोग के प्रारंभिक आधार पर ध्यान दें और समय पर प्रबंधन उपाय अपनाएं। नियमित पर्यवेक्षक, स्थिर स्तर के प्रबंधन, फ़ासल चक्र और फ़ेसल का चयन करके फ़सल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
