ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं के जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आये व्यापारी संघ
व्यापारी ही नहीं सुनते हैं अपने चुने हुए प्रतिनिधियों की बातों को
किरंदुल :- लोह नगरी किरंदुल के मुख्य बाजार को हमेशा से ही अखबारों की सुर्खियों में हेड लाइन में बने रहने की शायद आदत सी हो गई है।चाहे साप्ताहिक बाजार के दिन मुख्य मार्केट के अंदर के सब्जी विक्रेताओं के द्वारा रविवार और बुधवार को मार्केट के प्रवेश द्वार के साथ साथ लोडिंग प्लांट में बस स्टैंड की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर दुकानें लगाने का मसला हो या साप्ताहिक बाजार के दिन आस पास के आदिवासी ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं को मुख्य बाजार के साथ साथ मुख्य सड़क मार्ग में भी नहीं बैठने देने का मुद्दा हो या मुख्य मार्केट के अंदर दुकानदारों के द्वारा दुकानों के सामने झिल्ली बांध कर सड़क को बाधित करने का मुद्दा हो। समय समय पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा भी कई बार इन मुद्दों को बाधित करने वाले दुकानदारों को नोटिस भी दिया पर शायद शैया भय कोतवाल तो डर काहे की कहावत ही सही साबित हुई, उल्लेखनीय हैं कि विगत दिनों साप्ताहिक बाजार के दिन ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं को मैन मार्केट में स्थान प्राप्त नहीं होने पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने भी इसका विरोध करते हुए मुख्य बाजार का दौरा किया था।जिस कारण किरंदुल के व्यापारी संघो में भी सियासी हलचल मची हुई थी। नगर में तीन दिनों तक बंगाल की खाड़ी में आये तूफान अर्नब के कारण हुई मूसलाधार वर्षा और तेज तूफानी हवाओं के बाद करवट लेते मौसम के बीच चल रही चर्चा के अनुसार सियासी नजर के हिसाब से अगर मार्केट के सब्जी विक्रेता खुद अपने द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों की ही बात नहीं सुनते है तभी तो व्यापारी संघ को किरंदुल बाजार की व्यवस्था को सुधारने के लिए जिला प्रशासन की शरण में जा कर ज्ञापन देने के लिए विवश होना पड़ा। पान ठेलों और होटलों में चल रही आम चर्चा के अनुसार जनता ने यह भी प्रश्न लगाया है कि तो फिर ऐसे व्यापारी संघो का क्या औचित्य जिसके बात ही उसके संघ के सदस्य ना माने।
