योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और मैदानी निगरानी पर दिया जोर
महासमुंद – छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नेहरू राम निषाद ने आज महासमुंद प्रवास के दौरान दोपहर 2ः00 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में आयोग की श्रीमती अनिता ढेकाटे एवं लक्ष्मीकांत मिश्रा, जिला पंचायत की सीईओ सुश्री अनुपमा आनंद सहित जिले के विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक में आयोग अध्यक्ष नेहरू राम निषाद ने कहा कि शासन द्वारा समाज के प्रत्येक वर्ग के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं की सफलता केवल स्वीकृत प्रकरणों अथवा लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या से निर्धारित नहीं होती, यह देखना आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंचे।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल लक्ष्य पूर्ति और आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं के परिणाम और उनके जमीनी प्रभाव का भी आकलन करें। विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग सहित सभी पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, पात्रता के अनुसार लाभ दिलाने तथा किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने देने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही प्रशासनिक कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।श्री निषाद ने विभागीय अधिकारियों से योजनाओं के प्रचार-प्रसार को ग्राम एवं पंचायत स्तर तक प्रभावी बनाने को कहा, ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं मिलने वाले लाभ की जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए मैदानी अमले की भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर हितग्राहियों से सीधे संवाद करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि किसी भी शासकीय योजना की प्रभावशीलता उसके पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन से सुनिश्चित होती है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, हितग्राही सत्यापन तथा फील्ड स्तर पर निरीक्षण की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यालयीन रिपोर्ट के साथ-साथ मैदानी वास्तविकता को भी समीक्षा का आधार बनाया जाना चाहिए। योजनाओं से लाभान्वित लोगों के जीवन में हुए सकारात्मक बदलावों को चिन्हांकित कर उसका दस्तावेजीकरण भी किया जाना चाहिए, ताकि सफल प्रयासों को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके।बैठक में आदिम जाति विकास विभाग, महिला एंव बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मत्स्य, कृषि, शिक्षा, पशुपालन एवं अन्य विभागों की समीक्षा की गई। विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, लक्षित वर्ग को उपलब्ध कराए जा रहे लाभ, लंबित प्रकरणों, विभागीय गतिविधियों तथा मैदानी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की योजनाओं की प्रगति से आयोग को अवगत कराया तथा योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रस्तुत की।
आयोग द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ-साथ ग्राम स्तर पर योजनाओं की पहुंच का भी आकलन किया जाए। पात्र हितग्राहियों को लाभ मिलने में किसी प्रकार की कठिनाई, दस्तावेजी समस्या अथवा तकनीकी बाधा होने पर उसका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि योजनाओं का लाभ प्राप्त करने वाले हितग्राहियों की सफलता की कहानियों को सामने लाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाए।
