राजिम – राजिम विधानसभा क्षेत्र में सरकारी राशि से निर्मित कई भवनों के उपयोग और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन्हीं में से एक है करीब 70 लाख रुपए की लागत से निर्मित पुन्नी रिसॉर्ट, जो कभी पर्यटकों और सैलानियों की सुविधा का केंद्र बनने वाला था, लेकिन आज देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार है। करोड़ों की सरकारी योजनाओं की तरह इस भवन में भी गरीब किसान, मजदूर और आम नागरिकों से प्राप्त टैक्स की राशि लगी है, ऐसे में सरकारी संपत्ति का इस तरह जर्जर होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा निर्मित पुन्नी रिसॉर्ट का लोकार्पण वर्ष 2011 में तत्कालीन प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, पर्यटन मंडल अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय, कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पुन्नूलाल मोहिले, महासमुंद सांसद चंदूलाल साहू और पूर्व राजिम विधायक अमितेश शुक्ल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ था।
लोकार्पण के समय उम्मीद थी कि रिसॉर्ट राजिम आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएगा। यहां शादियों, सामाजिक आयोजनों और बड़े कार्यक्रमों के लिए बैंक्वेट हॉल के रूप में भी उपयोग की योजना थी।
पांच साल की लीज भी नहीं चल सकी
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2012 से 2017 तक पांच साल की अवधि के लिए रिसॉर्ट को किराए पर दिया गया था, लेकिन किराएदार करीब तीन साल बाद ही इसे छोड़कर चला गया। इसके बाद वर्ष 2017 में पर्यटन विभाग ने दोबारा लीज के लिए विज्ञापन जारी किया, लेकिन रिसॉर्ट को लेने के लिए कोई सामने नहीं आया।
बाद में इसे 30 साल की लीज पर देने की चर्चा भी हुई, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्र को डुबान क्षेत्र बताए जाने के कारण इस पर सहमति नहीं बन सकी। पांच साल की लीज के लिए कोई तैयार नहीं हुआ और 30 साल की लीज को लेकर प्रशासनिक अड़चन के बीच रिसॉर्ट लगातार उपेक्षित होता चला गया।
भवन मजबूत, लेकिन सामान हो रहा गायब
वर्तमान में रिसॉर्ट का बाहरी ढांचा और छत काफी हद तक मजबूत नजर आती है। फर्श पर लगे टाइल्स भी कई जगह अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद देखरेख के अभाव में भवन के अंदर का सामान लगातार खराब या गायब होता गया।
बिजली फिटिंग की पाइप, स्विच, बोर्ड और अन्य सामग्री निकाल ली गई है। दरवाजे तक तोड़कर ले जाए गए हैं। भवन में लगे एसीपी और पीवीसी पैनल टूटकर जमीन पर बिखरे पड़े हैं। परिसर में जगह-जगह कांच के टुकड़े नजर आते हैं।
रिसॉर्ट के बाहर बनाया गया गार्डन गजिबो भी अब वीरान पड़ा है। जहां कभी पर्यटकों की चहल-पहल की उम्मीद थी, वहां अब आवारा कुत्ते बैठे नजर आते हैं। सामने के मैदान में गायें घास चरती दिखाई देती हैं।
8 से 10 एकड़ में फैला परिसर, अहाता भी टूट रहा
करीब 8 से 10 एकड़ क्षेत्र में बने रिसॉर्ट के चारों ओर पहले ईंटों से बना अहाता था। रखरखाव के अभाव में यह अहाता भी कई स्थानों से कमजोर होकर गिर चुका है। इससे परिसर की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिसर में बड़े पेड़-पौधे आज भी मौजूद हैं, लेकिन नियमित देखरेख नहीं होने के कारण रिसॉर्ट की पुरानी रौनक पूरी तरह गायब हो चुकी है।
दोबारा शुरू हुआ तो पर्यटन को मिल सकता है लाभ
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुन्नी रिसॉर्ट को दोबारा शुरू करने के लिए शासन को शुरुआती दौर में मरम्मत और पुनर्व्यवस्था पर राशि खर्च करनी पड़ सकती है। इसके बावजूद यदि इसे व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाए तो लंबे समय में राजिम के पर्यटन को इसका फायदा मिल सकता है।
राजिम धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर ठहरने की सुविधा मिल सकती है। वर्तमान में कई पर्यटकों को रायपुर अथवा निजी लॉज का सहारा लेना पड़ता है।
नगर पालिका ने हैंडओवर करने की मांग रखी
नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव ने बताया कि दो दिन पहले पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा से मुलाकात कर पुन्नी रिसॉर्ट को नगर पालिका को हैंडओवर करने अथवा पर्यटन विभाग द्वारा स्वयं संचालित करने की मांग की गई है।
वहीं पर्यटन विभाग की पीआरओ अनुराधा दुबे ने बताया कि रिसॉर्ट के निर्माण में कितनी राशि खर्च हुई, इसकी जानकारी संबंधित सेक्शन से लेनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सेक्शन ही मोटल और रिसॉर्ट आदि से संबंधित जानकारी रखता है।
सवाल यह है कि जिस सरकारी संपत्ति को पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाखों रुपए खर्च कर तैयार किया गया था, उसके संरक्षण और उपयोग की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि भवन का ढांचा अभी भी उपयोग लायक है, तो उसे असामाजिक तत्वों और बदहाली के हवाले छोड़ने के बजाय पुनः उपयोग में लाने की पहल कब होगी?
70 लाख का पुन्नी रिसॉर्ट बना भूत बंगला, देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा सरकारी भवन
