औषधीय-बागवानी फसलों और रबी में दल्हन-तिलहन को बढ़ावा मिलेगा
धमतरी – जिला में नदी तट से लेकर क्षेत्र में खेती को अधिक समृद्ध, पर्यटक और जलवायु विविधता के लिए व्यापक पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी तट स्थित हैं, जो 152 क्षेत्र में भूमि की गहराई, ज्वालामुखी, मिट्टी, जल उत्खनन और सीलन के आधार पर फसल प्रणाली विकसित की जाएगी। योजना से करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबा होगा। जिले में महानदी के किनारे 97, पैरी नदी के किनारे 18, सोंढूर के किनारे 23 और खारून नदी के किनारे 14 गांव स्थापित हैं। सितंबर-अक्टूबर से सांस्कृतिक विविधता अभियान की शुरुआत की गई है। किसानों की मांग और स्थानीय परिदृश्य के अनुसार नवंबर-दिसंबर में दलहन-तिल्हन के बीज और औषधीय रसायन की कुंजी की दिशा के अनुसार भी काम किया जाएगा।
धान के साथ बढ़ेंगे खेती के नए विकल्प
नारियल का उद्देश्य धान की खेती को खत्म करना नहीं है, बल्कि किसानों को एक ही फसल पर आधारित बाहरी बागवानी खेती को अलग करना है। अधिक कृषि वाले क्षेत्र में धान प्रमुख फसल अवशेष, जबकि कटाई के बाद भूमि की क्षमता रबी और गर्मियों में नमी को बढ़ावा दिया जाएगा। अच्छे जल उत्पादकों वाली भूमि में धान के बाद मक्का, मूंग-उदद और तलहन-तिलहन, वनस्पति, औषधीय औषधीय, फलदार रसायन और चारा आधारित मॉडल विकसित किए गए।
थ्री जोन के अनुसार भूमि की स्थिति प्रस्तावित की गई है। अति एवं निम्न रक्तचाप प्रभावित क्षेत्रों में धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैस्मीन औषधीय मसालों को अनुमति दी जाती है। मध्यम व्हीलैस लैबोरेट्री वाले क्षेत्र में धान के बाद कम अवधि की दल्हन, तिलहन और शेष ली मंज़िल। इसके अलावा सर्वोत्तम जल उत्पादकों वाली भूमि में औषधीय फसल, दलहन-तिलहन, सब्जी, जैविक-प्राकृतिक फल खेती की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।
5,458 हेक्टेयर में रबी बीजा का प्रस्तावित विस्तार
नदी तट के लिए रबी समुद्र तट 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित है। इसमें चना 3,244.10, सरसों 662.80, सरसों 472.50, मक्का 243.90, उड़द 214.80, मूंग 178.70, मूंगफली 142.20, सूरजमुखी 39 और औषधीय फसल 110.60 खेती सहित अन्य फसलें शामिल हैं।
जल संरक्षण के साथ खेती का आधार
कृषि विविधता के साथ जल संरक्षण पर भी विशेष जोर रहेगा। महानदी किनारा धमतरी एवं मैग्लोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पांड, 17 सोकपिट तथा मैग्लोड में 7 चेकडैम/एएलएमटी सुधार के कार्य प्रस्तावित हैं। 75 नदी तटविद्या क्षेत्र में तटीय घास एवं महंगा उपयोग। खेत से रेत और तालाब से नदी तक पानी के तीव्र बहाव को रोकने के लिए माइक्रो-वॉटरशेड आधारित रेत तैयार की जाएगी।
रजिस्ट्रार ने कहा-किसान की आय और खेती की स्थिरता लक्ष्य
शोधकर्ता अविनाश मिश्रा ने कहा कि नदी तट के खेतों में खेती की खेती एक जैसी नहीं है। इसलिए स्थानीय भू-आकृति और पानी की मिट्टी के संग्रहालय गांववार माइक्रो-प्लान तैयार करने के लिए फसल चयन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “फसल विविधता का उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन के लिए अधिक उपलब्ध विकल्प खेती, खेती के जोखिम को कम करना और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। जल संरक्षण, सुविधा, फसल प्रदर्शन और किसान प्रशिक्षण को साथ लेकर ऐसी कृषि प्रणाली विकसित की जाएगी, जो वर्तमान के साथ भविष्य की खेती के लिए भी सहायक हो।”योजना के तहत प्रत्येक गांव में भूमि, ढलान, चट्टान, मिट्टी, नाला एवं कृषकों की स्थिति का सर्वेक्षण कर माइक्रो-प्लान तैयार किया जाएगा। धमतरी, कुरुद, मगरलोड और नगरी में उड़द-मूंग, मूंगफली, रागी, हल्दी, मक्का और चना जीरा के प्रदर्शन की भी संभावना है। इससे किसानों को खेत में ही वैकल्पिक बीज उत्पादन और लाभ का अनुभव प्राप्त होता है।
