स्टेडियम के खेल परिसर भवन में खेल सामग्री की सुरक्षा बनी मजाक

खेल विभाग के प्रभारी डिप्टी कलेक्टर की नाक के नीचे टूट गए ताले, चोर ले जाते रहे सामान; दो महीने तक जिम्मेदारों को भनक नहीं?

बीजापुर – जिला मुख्यालय के स्टेडियम में खेल विभाग की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्टेडियम के खेल परिसर के कमरों के ताले टूटे पड़े हैं, करोड़ों रुपये की खेल सामग्री फर्श पर बिखरी है और सामान की हालत देखकर साफ नजर आ रहा है कि यहां सुरक्षा और निगरानी नाम की कोई व्यवस्था नहीं है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पिछले करीब दो महीने से कमरों के ताले तोड़कर लगातार चोरी की जाती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। सवाल यह है कि जिस अधिकारी के प्रभार में व्यवस्था थी, उसके रहते इतने लंबे समय तक स्टेडियम में चोरों का आना-जाना कैसे चलता रहा?

*खरीदने में दिलचस्पी, बचाने की जिम्मेदारी से किनारा?*

खेल सामग्री की खरीदी पर भारी रकम खर्च करने वाले विभाग के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है—जब करोड़ों का सामान खरीद लिया गया तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
क्या सामग्री खरीदने के बाद उसे यूं ही चोरों के भरोसे छोड़ देना ही विभागीय व्यवस्था है? अगर स्टॉक और सुरक्षा की नियमित निगरानी होती तो क्या चोर इतने लंबे समय तक कमरों में घुसकर सामान निकाल सकते थे?

*स्वतंत्रता दिवस से पहले अधिकारी पहुंचे, फिर भी नहीं दिखी अव्यवस्था?*

हैरानी की बात यह है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर अधिकारी करीब 20 दिन पहले स्टेडियम का जायजा लेते रहे। इसके बावजूद कमरों की हालत, टूटे ताले और बिखरी पड़ी खेल सामग्री पर किसी की नजर नहीं पड़ी।

या फिर सवाल यह भी है कि नजर पड़ी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

*क्या दो महीने तक चलता रहा ‘खुला खेल’?*

अगर कमरों में चोर 12 से 15 घंटे तक रुककर सामान निकालते रहे, जैसा आरोप लगाया जा रहा है, तो यह सामान्य चोरी नहीं बल्कि विभागीय निगरानी की बड़ी विफलता का मामला हो सकता है। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सामान बाहर ले जाने के बावजूद सुरक्षा कर्मियों, अधिकारियों और प्रभारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

अब जरूरत सिर्फ ताला टूटने की जांच की नहीं, बल्कि पूरे स्टॉक की जांच, खरीदी की जांच, सुरक्षा व्यवस्था की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है।

—करोड़ों का सामान खरीदने वाले जिम्मेदार अधिकारी उसे चोरों से भी नहीं बचा पाए तो आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?