सोनपुर से कोसपड़का तक सरकारी जमीन का खेल? 5 एकड़ पर कब्जे की कोशिश, कीमती पेड़ों की कटाई के आरोप से मचा हड़कंप

नारायणपुर/कोसपड़का – ग्राम सोनपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित कोसपड़का गांव में करीब 5 एकड़ सरकारी जमीन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर मौजूद बड़ी संख्या में कीमती पेड़ों को कथित रूप से कटवाकर जमीन को साफ किया गया और उसे कृषि भूमि के रूप में तैयार करने की कोशिश की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, इस मामले में सोनपुर स्थित आदिवासी बालक छात्रावास के अधीक्षक मनकू नेताम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छात्रावास से जुड़े कर्मचारियों के माध्यम से पेड़ों की कटाई करवाई गई और इसके बाद जमीन को खेती के योग्य बनाने का प्रयास किया गया।

5 एकड़ सरकारी जमीन आखिर किसके लिए?

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल है कि यदि जमीन सरकारी है तो उसे साफ कर खेती के लिए तैयार करने की अनुमति किसने दी? क्या पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से अनुमति ली गई थी? जमीन का सीमांकन किसके नाम या किस प्रयोजन के लिए है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जमीन पर मौजूद कीमती लकड़ी को काटे जाने के बाद उसे कहां ले जाया गया, इसका भी पता लगाया जाना चाहिए। यदि सरकारी पेड़ों की कटाई हुई है तो वन विभाग के रिकॉर्ड में इसकी अनुमति और लकड़ी के परिवहन से संबंधित दस्तावेज भी होने चाहिए।

प्रशासन की जांच से खुलेगा पूरा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने राजस्व विभाग, वन विभाग और आदिवासी विकास विभाग से संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। जांच में सरकारी जमीन का सीमांकन, पुराने राजस्व रिकॉर्ड, पेड़ों की स्थिति, कटाई की अनुमति और वर्तमान में जमीन के उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल पेड़ों की कटाई का मामला नहीं, बल्कि सरकारी भूमि पर कथित कब्जे और सरकारी संपत्ति के उपयोग से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इस मामले में संबंधित अधिकारी और छात्रावास अधीक्षक का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।