19 साल… 14 कलेक्टर… फिर भी नहीं बदली तस्वीर: बाढ़ आते ही कैद हो जाते हैं बीजापुर के 5 गांव

सरकारी विकास के दावों की खुली पोल, दो महीने से बिजली गुल, न शिक्षक, न नेटवर्क, न समय पर राशन

ईश्वर सोनी

बीजापुर – एक ओर सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं बीजापुर जिले की चिन्नाकवाली पंचायत के गुड्डीपाल, कांदुलनार, आदेड, रालापाल और चिन्नाकवाली गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बारिश शुरू होते ही इन गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और ग्रामीणों की जिंदगी मानो ठहर जाती है।

जिला बने 19 साल बीत चुके हैं। इस दौरान 14 आईएएस कलेक्टर बदल गए, करोड़ों रुपये की योजनाएं आईं, लेकिन इन पांच गांवों की तकदीर नहीं बदल सकी। आज भी यहां बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों की पहुंच से दूर हैं।

*दो महीने से अंधेरे में पांच गांव*

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले करीब दो महीने से बिजली पूरी तरह बंद है। शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। मोबाइल चार्ज करना तो दूर, बच्चों की पढ़ाई और सामान्य जीवन भी प्रभावित हो चुका है।

*शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे*

गांवों में स्कूल तो हैं, लेकिन शिक्षक नियमित रूप से नहीं पहुंचते। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी कभी जमीनी हकीकत देखने तक नहीं पहुंचे।

*बरसात आते ही राशन के लिए भी संघर्ष*

बारिश में नदी-नाले उफान पर आते ही पीडीएस की व्यवस्था भी चरमरा जाती है। कई बार राशन समय पर नहीं पहुंचता और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

*न नेटवर्क, न इंटरनेट… आपातकाल में भी बेबस*

मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट लगभग पूरी तरह ठप रहते हैं। किसी आपात स्थिति में न एंबुलेंस से संपर्क हो पाता है और न ही प्रशासन तक सूचना पहुंच पाती है।

*बीमार पड़ना मतलब जिंदगी से जंग*

स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी बारिश में गांवों तक नहीं पहुंच पातीं। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाना किसी परीक्षा से कम नहीं होता। कई बार नदी-नालों का उफान इलाज तक पहुंचने की राह रोक देता है।

*बारिश के 3 महीने हर साल वही हाल, समाधान अब तक नहीं*

हर मानसून में पांचों गांव बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। सवाल यह है कि जब हर साल यही स्थिति बनती है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया? आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद इन गांवों की तस्वीर कब बदलेगीग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, बारिश से पहले राशन का भंडारण कराया जाए, स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत की जाएं तथा नदी-नालों पर स्थायी पुल और सर्वकालिक सड़कें बनाई जाएं, ताकि हर साल उन्हें ऐसी बदहाली का सामना न करना पड़े।

*जिला बनने के बाद अब तक रहे कलेक्टर*

लखन सिंह केन, IAS

मुनीश कुमार त्यागी, IAS

जेवियर टिग्गा, IAS

आर. प्रसन्ना, IAS

रजत कुमार, IAS

मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, IAS

यशवंत कुमार, IAS

डॉ. अय्याज तंबोली, IAS

के. डी. कुंजाम, IAS

रितेश कुमार अग्रवाल, IAS

राजेन्द्र कुमार कटारा, IAS

अनुराग पांडेय, IAS

संबित मिश्रा, IAS

विश्वदीप, IAS वर्तमान में है