गोबरा नवापारा – आषाढ़ माह की झमाझम बारिश के बीच नगर में आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। हिंदुओं के प्रमुख पर्वों में से एक भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा बुधवार को पूरे धूमधाम और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। मान्यता है कि रथयात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। इसी परंपरा के तहत नवापारा नगर में भी महाप्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की रथयात्रा श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली गई। बारिश को मानो स्वयं भगवान का आशीर्वाद मानते हुए हजारों श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े। नगर के सुप्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण मंदिर और श्री सत्यनारायण मंदिर, साईं मंदिर से दोपहर में विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद भव्य रथ को खींचने की परंपरा शुरू हुई। रथ को नगर के मुख्य मार्गों से होकर निकाला गया। वही जगह जगह भव्य स्वागत वहीं नवजात बच्चों को भगवान से स्पर्श कराया गया , साथ ही श्रद्धालुओं ने सुभाष चौक पर आकर्षक रंगोली बनाकर अपनी आस्था प्रकट की l रथ यात्रा का मार्ग इंदिरा मार्केट, सदर रोड, सुभाष चौक, काली मंदिर और गंज रोड होते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में भक्तों की भीड़ जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा के नारों से गूंजती रही। श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। जगह-जगह महिलाओं ने आरती उतारी और फूलों की वर्षा की। सबसे खास बात यह रही कि प्रकृति ने भी इस पर्व का स्वागत किया। आषाढ़ की झमाझम बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने बिना किसी परेशानी के पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में भाग लिया। लोगों का मानना था कि यह बारिश महाप्रभु का आशीर्वाद है। रथयात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्ग में चाक-चौबंद व्यवस्था की थी वहीं विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने बिजली के तारों को दुरुस्त कर विशेष सहयोग दिया ताकि रथ बिना बाधा के निकल सके। नगर पालिका और स्वयंसेवी संगठनों ने पीने के पानी और छाया की व्यवस्था भी की थी। रथयात्रा का सबसे आकर्षक हिस्सा था महाप्रभु का प्रसिद्ध प्रसाद “गजामुंग”। भक्तों की लंबी कतारें प्रसाद लेने के लिए लगी थीं। प्रसाद पाकर श्रद्धालु अपने को धन्य-धन्य महसूस कर रहे थे। रथयात्रा देखने के लिए न सिर्फ नवापारा नगर से बल्कि आसपास के गांवों गोबरा, नवापारा, पारा, कुरुद और अन्य क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे।संतों और मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक है। बारिश के बीच निकली इस रथयात्रा ने पूरे नगर को भक्ति के रंग में रंग दिया। समापन पर मंदिर में महाआरती की गई और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। नगर एक तरह से पुरी धाम जैसे प्रतीत हो रहा था.
