( सुकमा ,बीजापुर के युवाओं को गार्डो में भर्ती कर रही सीडीओ सर्विसेज )
( एनएमडीसी कर्मियों की गाढ़ी कमाई का सीडीओ कर रही दुरुपयोग )
किरंदुल – एनएमडीसी की किरंदुल परियोजना में आवासीय क्षेत्र, विद्यालय परिसर, अस्पताल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सुरक्षा गार्डो की तैनाती के जिम्मे का कार्यादेश भिलाई की सीडीओ सिक्योरिटी एंड पब्लिक हेल्पलाइन सर्विस भिलाई को मिला है । उल्लेखनीय हैं कि जिस सीडीओ सिक्योरिटी पब्लिक सर्विस को एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के क्षेत्रों में सुरक्षा गार्डों की तैनाती का कार्यादेश मिला है ।उस सीडीओ कंपनी पर पिछले साल एनएमडीसी बचेली परियोजना में मिले कार्यादेश के दौरान करोड़ो रूपये के गबन के आरोप लगे थे । लगे आरोप के बीच यह बात सामने आई थी कि सीडीओ कंपनी के सुपरवाइजर और मैनेजर ने मिलकर एनएमडीसी बचेली परियोजना में सीडीओ को मिले सुरक्षा गार्डों के जिम्मे के दौरान 3 वर्षो में लगभग 3 करोड़ के गबन का आरोप लगा था ।यह राशि परियोजना कर्मियों के वेतन से काटी गई अंशदान की राशि थी । साथ ही लगे आरोपों के बीच जब सीडीओ सीडीओ कंपनी के चेयरमैन अंजनी द्विवेदी बचेली पहुंचे थे तो उनके सामने ही कंपनी के सुपरवाइजर और मैनेजर ने गार्डो के सामने ही गार्डो के खातों से पैसा निकाल कर गबन करने और करीब 30 फर्जी नामों से लगातार वेतन आहरण करने की भी बात स्वीकार की थी । गौरतलब है कि जिस सीडीओ सिक्योरिटी सर्विस पर बचेली परियोजना में सुरक्षा गार्डों के वेतन के नाम से करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगा था उस कंपनी का किरंदुल में कैसा कार्यकाल रहेगा । विदित हो कि सीडीओ सिक्योरिटी सर्विसेज भिलाई को किरंदुल परियोजना से गार्डो की सप्पलाई के लिए मिले कार्यादेश में नए गार्डो की भर्ती का विवादित मामला थमने का नाम ही नही ले रहा है ।मिली जानकारी के अनुसार कुल 191 पोस्ट की नियुक्ति की जानी चाहिए थी परंतु सीडीओ सिक्योरिटी सर्विसेज ने अभी तक 233 गार्डो की नियुक्ति कर दी है । परंतु एक सवाल स्थानीय बेरोजगार युवकों का यह है कि भर्ती कितनी भी पोस्टो के लिए हो परंतु किरंदुल के स्थानीय स्तर के युवाओं के लिए होनी चाहिए ना कि सुकमा और बीजापुर जिले के युवाओं के लिए । किरंदुल के स्थानीय बेरोजगार युवकों ने सीडीओ सिक्योरिटी सर्विसेज भिलाई के चेयरमैन अंजनी द्विवेदी से मीडिया के माध्यम से गुहार लगाई है कि अंजनी जब हम किरंदुल के बेरोजगार लाइन में खड़े हैं तो दूसरे जिले के युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में जायज बतलाकर उनकी नियुक्ति समझ से परे है ।स्थानीय युवाओं का यह भी कथन है कि जब हमारे साथी किरंदुल परियोजना के श्रमिकों के वेतन से काटकर सीडीओ को 40 रुपये का प्रति कर्मचारी अंशदान दिया जाएगा तो हम किरंदुल के युवाओं को वेटिंग लिस्ट में क्यों रखा गया है ।
