अल-नीनो की स्थिति को लेकर कृषि विश्वविद्यालय ने विशेष एड स्टॉक के लिए जारी किया

रायपुर – भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा अल-नीनो के प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने एस्टेट 2026 के लिए राज्य के कृषि विभाग को आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं।
एड उद्यमों में किसानों को लघु एवं मध्यम अवधि में खनिजों वाली फसलों के ढांचे को बनाने की सलाह दी जाती है, इसके बजाय धान के रोपा पद्धति के बजाय सीधे आवंटन (डीएसआर) को निर्देश दिया जाता है और खेतों में पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है। विश्वविद्यालय के अनुसार डीएसआर तकनीक से लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है और उत्पादन लागत भी कम होती है।
उच्च भूमि क्षेत्र में धान का स्थान अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी दल्हनी एवं तिलहनी खेती की खेती की जाती है। किसानों को ग्राफिक्स से सांख्यिकी, बीजोपचार, टाइम पर स्केल्प और नियंत्रण तकनीक की सलाह भी दी गई है।
एड डिजायनरी के यदि 15 जुलाई तक स्कोरन नहीं होता है तो पुनः आरंभ कर सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग किया जाए। कम वर्षा की स्थिति में नैत्रजन मानक का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत नाइट्रोजन या नाइट्रोजन के अंश को अधिक बताया गया है।
कृषि ने ग्राम स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जल संरक्षण को बढ़ावा दिया, डबरीज़, तालाबों और कुओं में वर्षा जल संचयन और आवश्यकता पर जीवन रक्षक सीनल के लिए संचित जल का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही कृषि कार्य की योजना बनाने, ड्रिप और स्प्रिंकलर सूक्ष्म सीनेल तकनीक को बढ़ावा देने और कृषि विविधीकरण के माध्यम से जोखिम कम करने की सलाह दी गई है।
किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि संबंधी किसी भी समस्या या तकनीकी मार्गदर्शन के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केंद्र या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें।