एग्रीस्टेक के बिना भी किसानों को मिलेगा खाद, जिले में पर्याप्त भंडार उपलब्ध

औद्योगिक एवं जापानी प्रौद्योगिकी से समय, श्रम और लागत में बचत किसान का उपयोग करें

किसानों ने साझा अनुभव पर दस्तावेज़ का उपयोग किया

धमतरी – मौसम सीजन के किसानों के लिए खाद वितरण की व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाया गया है। रजिस्ट्रार  अविनाश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टेक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। जिले के सभी प्राथमिक कृषि साख प्रमाणपत्रों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए तथा वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी न पाई जाए।रजिस्ट्रार श्री मिश्रा ने बताया कि जिले में डिग्री, डीएपी, एनपीके सहित विभिन्न प्रकार के मानकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। वर्तमान जिले में कुल 20 हजार 740 मिक्सर टन खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है, जिसमें अब तक 7 हजार 59 हजार 59 हजार 59 हजार 740 स्पाइडर टन खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है। जिले में लगभग 17 हजार 141 मक्के टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है तथा मांग के अनुसार लगातार वितरण किया जा रहा है।उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी का विरोध करते हुए अपील की कि कई साख राक्षसों में डूबने की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है, जिसके माध्यम से साक्षियों का साज़िश कम समय में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इससे किसानों के श्रम, समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और नमी को आवश्यक पोषक तत्व बेहतर तरीके से प्राप्त होते हैं। इकोनोमिक पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी विकल्प के रूप में उभर रहा है।

किसानों ने साझा किया सकारात्मक अनुभव

धमतरी विकासखंड के लोहारसी ग्राम के किसान श्री हरिराज सिन्हा ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से पांच एकड़ धान की फसल में बाकी हिस्सों का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार यह कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है और लंबी अवधि में लीज की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने बताया कि पहले पारंपरिक के परिवहन और सम्मिश्रण में दो से तीन दिन का समय लगता था, जबकि विसर्जन तकनीक से यह कार्य कुछ चौथाई में पूरा किया जा सकता था, जिससे लगभग 20 प्रतिशत लागत की बचत होती है।लोहरसी के ही किसान  योगेश कुमार साहू पिछले दो वर्षों से अपने निजी भूखंड पर कोयले का उपयोग कर धान की खेती कर रहे हैं। कुरूद क्षेत्र के किसान  वेगवान ने बताया कि सब्जी के प्रयोग से लेकर क्वारेंटाइन की मात्रा कम लगी और उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला, जिससे उन्होंने इस वर्ष अपने पूरे रकबे में इसका उपयोग करने का निर्णय लिया है।मगरलोड क्षेत्र के किसान  मोहन ने बताया कि सबसे पहले बाइबिल की किताब में एक बड़ी चुनौती हुई थी, जबकि डूब प्रौद्योगिकी से समय और श्रम दोनों की बचत हुई थी। वहीं धमतरी विकासखंड की किसान श्रीमती संगीता साहू ने कहा कि कृषि के उपयोग से लागत में कमी आई है और फसल की पैदावार भी बेहतर हुई है।

पॉज़ मशीन से हो रहा है सटीक वितरण

कृषि विभाग द्वारा कोटि, डीएपी, पोटाश सहित सभी वैरायटी के माध्यम से पॉस मशीनों का वितरण किया जा रहा है। इससे प्रत्येक किसान को उसकी जोत के अनुसार प्रचुर मात्रा में खाद उपलब्ध करायी जा रही है। खाद की कालाबाजारी एवं अधिक कीमत पर बिक्री रोक के लिए उड़नदस्ता शेयर होल्डरों द्वारा साझेदार एवं निजी कर्मियों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है.जिले की 96 संबद्धता में खाद्य पदार्थों की भंडारगृहों की सुरक्षा की गई है और भंडारगृहों की नियमित निगरानी की जा रही है। मार्क फेड एवं एसोसिएट संस्था के माध्यम से खाद की सतत आपूर्ति जारी है। साथ ही होटल एवं टेक्नोलॉजी डीएपी के उपयोग को भी अधिकृत किया जा रहा है। 225 रुपये में उपलब्ध 500 प्रयोगशाला प्रयोगशाला की एक बोतल पारंपरिक रसायन विज्ञान के मध्यवर्ती तत्व उपलब्ध कराता है।

किसानों से अपील

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की मांग केवल विशेष प्रमाण पत्र और लाइसेंस प्राप्त करें। किसी भी प्रकार की भर्ती या अधिक कीमत वसूले जाने की स्थिति में किसान जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष क्रम 07722-232249 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि जिले में किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े तथा समय पर जिले में सामुहिक खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जा सके।