चार माह की अबोध बच्ची को मिला सूरत के जैन दम्पति का साया

कांकेर – जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी के निरीक्षण में चार माह की बच्ची को अब नए माता-पिता मिल गए हैं। सूरत (गुजरात) निवासरत भारतीय दम्पति श्री हैप्पी एवं श्रीमती शिक्षा जैन को दत्तक ग्रहण के अधीन बच्चे को गोद दिया गया। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने आज अपने कक्ष में उक्त दम्पति के हाथों में गाँव कु. देविका को अस्वीकार और उन्हें माफिया खिलाड़ी अपनी वोट की शर्ते बताते हैं। इस तरह के बच्चे को माता-पिता का साया मिल गया, जहां जैन दम्पति को अबोध बच्चे के रूप में परिवार का नया सदस्य मिला।जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास  मयंक जैन ने बताया कि सूरत गुजरात के सम्राट श्री होली वा शिक्षा जैन के परामर्शदाता दत्तक लीज स्रोत का अधिकार प्राप्त हुआ था, जिसमें इस पाठ्यक्रम को 10 अप्रैल 2026 को पुनः प्रकाशित किया गया था और 12 अप्रैल को बालिका को आरक्षित किया गया था। इसके बाद उन्हाने बच्ची से मुलाकात कर उसे स्वीकार कर लिया। आज 09 जून को अधिग्रहीत के कब्रिस्तान कोर्ट में कलेक्टर के लिए पेश किया गया और कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने सत्यनारायण जैन दम्पति को कथित बच्चे को गिरफ्तार कर लिया और उनके सुनहरे भविष्य की कामना की। बच्ची को पालने वाले भावी दत्तक माता-पिता काफी खुश थे। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्रीमती रीना लारिया एवं संस्था के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।ज्ञात हो कि जिले में संचालित विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी से अब तक 21 बच्चों को गोद लिया जा चुका है और अन्य राज्यों में 32 बच्चों को दत्तक ग्रहण दिया जा चुका है। वहीं डॉक्युमेंट्री में 09 बच्चों को दत्तक के रूप में दिया गया है। वर्तमान में 44 भावी दत्तक माता-पिता विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी में पंजीकृत हैं। भारत में कानूनी रूप से शिशु गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से अपवित्रता और सुरक्षा है। वर्तमान में यह व्यवस्था किशोर न्याय (बाल्कन की दर्शन एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 यथा कृप्या 2021 एवं दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के अंतर्गत संचालित है। बताया गया है कि भारत में गोद लेने के नियम, योग्यता और इसकी प्रक्रिया के तहत गोद लेने के लिए माता-पिता को दीक्षा देना पूरा करना होता है। जिसके तहत पहचान से संबंधित दस्तावेज, दस्तावेज की स्थिति, आयु सीमा, स्वास्थ्य जांच (भावी दत्तक माता-पिता और बच्चे), गृह अध्ययन रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज की जांच आवश्यक रहती है। वैध और क़ानूनी तरीक़े से ही दत्तक ग्रहण सुरक्षित है। जिला प्रशासन द्वारा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा के लिए वैध और दत्तक ग्रहण का ही समर्थन करने की अपील की गई है। यदि कहीं भी कोई बेसहारा बच्चा मिले तो जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग कांकेर या सीधे बाल हेल्प लाइन 1098 पर सूचित करें।