कृषि विभाग की योजना बनी सहारा, हीरादेवी साहू ने कार्यालय शुरू किया

अब गांव में ही हो रही धान की कुट्टी, किसानों को मिल रही बड़ी राहत

धमतरी – धमतरी जिले के ग्राम भोंटाडीह की निवासी श्रीमती हीरादेवी साहू आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल उभर रही हैं। कृषि को जीवन का आधार वाली लालची हीरादेवी साहू वर्षों से पारंपरिक खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। सीमित के बावजूद वे परिश्रम, लगन और सकारात्मक सोच के बल पर अपने जीवन में बदलाव लाते हैं। कृषि विभाग की योजना के तहत स्थापित मिनी राइस मिल ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि पूरे गांव के किसानों को भी नई सुविधा और अवसरों के द्वार खोले हैं।पूर्व में हीरादेवी साहू को अपने खेत में कृषि उपज धान की कुट्टी एवं गोदाम के लिए आरक्षित मिलों पर छूट दी गई थी। इससे परिवहन में अतिरिक्त खर्च, समय का नुकसान और कई बार धान की गुणवत्ता प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्र में छोटी मात्रा में धान ले जाने वाले किसानों के लिए यह प्रक्रिया और भी कठिन थी। इन रेनॉल्ड्स में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना उनके लिए आशा की किरणें सामने आई।वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग के दिशानिर्देश एवं सहयोग से उन्होंने अपने गांव में मिनी राइस मिल की स्थापना की। सबसे पहले उन्होंने अपने काम को नई दिशा दी। अब वे अपने खेत में धान का स्थानीय स्तर पर ही गोदाम कर रही हैं। इससे न केवल समय और परिवहन लागत में कमी आई है, बल्कि धान की गुणवत्ता भी बेहतर बनी है। स्थानीय स्तर पर होने से उत्पाद का बाजार मूल्य भी बेहतर प्राप्त होता है।मिनी राइस मिल की स्थापना के बाद हीरादेवी साहूकार केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने आसपास के किसानों को भी अपनी मिल की सुविधा उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। अब ग्राम और आसपास के किसान कम खर्च और कम समय में धान की कुताई करा पा रहे हैं। इससे किसानों को सुविधा बैठक के साथ-साथ हीरादेवी साहू को अतिरिक्त आय का प्रतिष्ठित स्रोत भी प्राप्त हुआ है। उनके इस पहले गांव में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिले हैं और ग्रामीण क्षेत्रों को भी जगह मिली है।हीरादेवी राय बताती हैं कि शासन की मंजूरी ने उन्हें संविधान और आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की। वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी मठ एवं कृषि आधारित एंटरप्राइजेज के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी सफलता यह सही है कि यदि परिभाषा का लाभ पात्र तक क्षेत्र और श्रम का समावेश हो, तो ग्रामीण क्षेत्र में भी आर्थिक आरक्षण और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।आज हीरादेवी साहूकार की मिनी राइस मिल केवल एक मशीन नहीं, बल्कि गांव की प्रगति, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की भावना का जीवंत प्रतीक बन गई है।