कांकेर – जिला वनोपज सहयोगी संघ मर्यादित कांकेर ने वनधन योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। हर्रा वनौषधि संस्था इच्छा केंद्रपुर आज आत्मनिर्भरता और महिला संसद का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।
वनधन विकास केंद्र इच्छापुर की स्थापना के तहत 17 ग्रामों के 2137 परिवार जुड़े हुए हैं, इनमें से 1512 परिवार लघु वनोपज संग्रह से अपना अधिग्रहण कर रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा खनिज विकास निधि द्वारा मेड के माध्यम से पलवेर मशीनरी, लेबल सामग्री, लेबल एवं अन्य आवश्यक सामग्री समूह को प्रदाय कर सहकारी केंद्र का संचालन शुरू किया गया। हर्रा वनौषधि कंपनी केंद्र का संचालन इंदिरा वन मितान स्व सहायता समूह के सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। समूह की महिलाओं ने वनौषधियों का संग्रह, कारखाने और कारखाने का काम शुरू किया, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार प्राप्त हुआ। इस केन्द्र में वर्तमान में 08 प्रकार के वनौषधि उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं, जिनमें हर्रा, बहेड़ा, त्रिफला, अश्वगंधा, सफेद मूसली, नीम, सतावरी एवं अन्य संघ शामिल हैं। मानक के अनुसार मानक के अनुसार बाजार में उपलब्ध फ्लैट्स जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और पहचान दोनों में वृद्धि हुई है। इसके लिए ग्रुप की महिलाओं को समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य के आयुर्वेद विभाग एवं राज्य संघ मुख्यालय द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे आयुर्वेद की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। वर्तमान में हर्रा वनौषधि केंद्र का संचालन इंदिरा वन मितान स्व-सहायता समूह इच्छापुर द्वारा किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में 75 लाख 76 हजार 375 डॉलर का संस्कृत वनौषधि डिपो का निर्माण कर मार्ट कांकेर को आपूर्ति की गई है, जिससे प्रत्येक समूह को लगभग 35 से 40 हजार डॉलर तक की आय प्राप्त हो रही है। स्व सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि पहले वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। कश्मीर में कभी-कभार मैथ्यू से मुलाकात के कारण उन्हें आर्थिक असमानताओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने समूह के रूप में एसोसिएट वनौषधि कंपनी के क्षेत्र में कदम रखा और औषधीय औषधि का निर्माण शुरू किया। शुरुआत में साधनों की कमी, बाज़ार की जानकारी की कमी और तकनीकी प्रतिभाएँ सामने आईं, लेकिन उनके मजबूत संकल्प, परिश्रम और सामूहिक प्रयास ने हर बाधा को पार कर लिया। आज ये महिलाएं आत्मनिर्भर महिलाएं हैं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज में भी एक पिछड़ा वर्ग की पहचान बनी हैं। अब वे केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही हैं, बल्कि समाज में अपनी पहचान मजबूत की है। उनके फायदे बढ़े हुए हैं और वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
हर्रा वनौषधि संस्था से स्व सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर
इच्छापुर ग्रुप ने अब तक 75 करोड़ की लागत से वनौषधि कार्यशाला का निर्माण कराया है
