तिल्दा नेवरा में अवैध लाल ईंटों का काला कारोबार

प्रेम बंजारे 

तिल्दा नेवरा – क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित लाल ईंट भट्टों का मामला लगातार गहराता जा रहा है। यह लाल ईटों का कारोबार शहर से लेकर गांव तक फैला हुआ है जिसमें तिल्दा सासाहोली, बिलाड़ि, परसदा, सरोरा, कोटा, आदि।कुम्हार समुदाय को दी गई सीमित पारंपरिक अनुमति की आड़ में अन्य व्यक्तियों द्वारा लाखों की संख्या में लाल ईंटों का निर्माण किया जा रहा है।

*कुम्हारों को सीमित मात्रा में लाल ईटा निर्माण की अनुमति*

राजस्व नियमों के तहत पारंपरिक कुम्हारों को सीमित मात्रा में मिट्टी लेकर छोटे स्तर पर ईंट या अन्य मिट्टी उत्पाद बनाने की छूट दी जाती है। यह अनुमति घरेलू या सीमित व्यावसायिक उपयोग तक ही होती है।लेकिन कुछ प्रभावशाली लोग द्वारा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन कर रहे हैं। यहां प्रतिवर्ष लाखों ईंटों का निर्माण हो रहा है, जो स्पष्ट रूप सीमा से परे है।

*बड़े व्यापारियों और की भूमिका पर सवाल*

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार के पीछे बड़े व्यापारी सक्रिय हैं। जो लाखों ईटों का निर्माण कर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं सासाहोली से लेकर बिलड़ी तक जाने पर ईंटों के दस्ट का ऐसा गुब्बार उड़ता है जिससे रास्ते पर आने जाने वाले लोग परेशान हो जाते हैं आरोप यह भी है कि कथित रूप से असामाजिक तत्वों के संरक्षण में यह कार्य किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक शिकायत करने से हिचक रहे हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जनचर्चा तेज है।

*पर्यावरण और कृषि पर गंभीर प्रभाव*

कृषि योग्य भूमि से 4–5 फीट तक मिट्टी निकाले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे खेतों की उर्वरता कम हो रही है और भविष्य की खेती प्रभावित हो सकती है।

भट्टों से निकलने वाला धुआँ और प्रदूषण आसपास के शहर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है।

*प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग*

स्थानीय नागरिकों ने राजस्व, खनिज विभाग से संयुक्त जांच की मांग की है। अवैध ईंट निर्माण किया जा रहा है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

*तहसीलदार का बाइट* 

वही तिल्दा नेवरा के तहसीलदार रामप्रसाद बघेल का कहना है कि अवैध ईटा भट्टों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी और जो भी शासन की गाइडलाइन होगी उसके तहत दोषियों पर कार्यवाही होगी.