*कीमत*:महेश राजा/
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रीमा फोन पर कह रही थी।घर परिवार के लिये इतना कुछ करती हूँ, पर मेरी कदर नहीं।
राज ने हँस कर कहा,-“कौन कहता है,हम है न।वैसे भी घर का जोगी जोगड़ा।समय आने पर वे सब जानेंगे।तुम सर्वगुण संपन्न हो यह सब जानते है।
साहित्य की बातें हो ही रही थी की रीमा के दूसरे फोन पर पडोसन भाभी का फोन आ गया।उनके घर दोपहर को पूजा थी तो एक कामवाली की जरूरत थी।
रीमा ने जवाब दिया कि कामवाली व्यस्त रहती है,वह तो नहीं आ पायेगी।पर,हाँ मेरी जरूरत हो तो कालेज से हाफ डे लेकर हाथ बँटाने आ सकती हूँ।
राज ने फोन रख दिया।वह रीमा को जानता था ।दूसरों की मदद के लिये वह हमेंशा तैयार रहती हूँ।पूरी तन्मयता के साथ।पर उसे रीमा के समय की कीमत का भी अंदाजा था।राज के लिये रीमा बहुत कीमती थी।मन ही उसे नमन कर दुआएं देता हुए लेखन में जुट गया।
