जिले के किसान उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग कर रहे हैं।

कांकेर – कृषि अभियांत्रिकी कांकेर में उन्नत कृषि यंत्र एवं मशीनें जैसे बेलर, डायरेक्ट सीड फोर राइस, मल्टी क्राप सीड्रिल, मल्टीक्रॉप प्लान्टर, मालचर आदि का उपयोग जिले के किसान कर रहे हैं। धान की कटाई आधुनिक बेलर मशीन द्वारा फ़ासल स्ट्राम्प (पैरा) से तैयार की गई।

सहायक कृषि कलाकारों ने बताया कि कांकेर विकासखंड के ग्राम जूनवानी, मालगांव, बागोदर, गढ़पिछवाड़ी, पटौद, नंदनमारा, बेवरती, गोविंदपुर, पुसवे, सातलोर में पैरा एसोसिएशन बनाया गया। इसी प्रकार नरहरपुर विकासखंड के ग्राम कुराना, लारगांव, कन्हारपुरी, चारामा विकासखंड के ग्राम कुरुभाट, भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कोरर एवं विकासखंड कोयलीबे के ग्राम कापसी के किसानों के यहां 400 घंटे का काम किया गया, जिसमें 11050 पैरा प्लांट (बेल) बनाए गए। उन्होंने बताया कि ब्याज क्षेत्र के किसान हार्वेस्टर से फसल कटाई के बाद बाख खेत में पारा को जला देते थे, जिससे पर्यावरण प्रदूषण होता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसके अलावा बेलर मशीन से बने पैरा बैल का उपयोग किसानों द्वारा पशुचारा एवं मशरूम उत्पादन के लिए किया जाता है। ग्राम कुरूभट के क्रांतिकारी विश्वनाथम ने बताया कि उन्होंने पहली बार कृषि अभियांत्रिकी में 1586 नाग पैरा बेल फाइट से बेलर मशीन उपलब्ध कराई थी, जिसका उपयोग मशरूम उत्पादन एवं पशुचारा किया जाता है। बेलर मशीन से पैरा यूनिट स्टॉक में बनता है, परिवहन आसान भंडारण भंडार कम जगह में हो जाता है।
असिस्टेंट एग्रीकल्चर आर्टिस्ट ने बताया कि रबी फसल खेत की तैयारी के लिए मल्चर मशीन का उपयोग जिले के ग्राम बोर्गाव पुसवे, गढ़पिछवाड़ी, आतुरगांव और सारंगपाल के किसानों के खेतों में कुल 70 घंटे तक काम किया गया। मशीन द्वारा खेत में बैफल फ़ार्म फ़्रैंचाइज़ी को मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी की असाधारण क्षमता बढ़ जाती है और खेत में अवशेष बने रहते हैं। रबी फ़सल भट्टियां, मक्का की बोनी द्वारा निर्मित उन्नत कृषि यंत्र, विशेष डायरेक्ट सीड फ़ोर राइस, मल्टी क्राप सीडड्रिल, मल्टीक्रैप प्लांटर का उपयोग जिले के ग्राम कार्प, बथबनी, कुना, मानिकपुर, घोड़ादा बफ़ेलोमुंडी, खोखिया, किरगापति, देवरीबालाजी, आतुरगांव, गढ़पिछड़ी, बीसकोंगेरा, पथरी और सरंगपाल के खेतों में 145 घंटे का समय लगा। गया। ग्राम आतुरगांव के कॉन्सोल श्री मोहम्मद अय्यूब ने पहली बार बताया कि 03 मई 2018 को मक्का में खेती की गई मशीनों से खेती की गई, जिससे खेती बहुत अच्छी हुई, मशीन से जमीन और मक्का की बोनी कम समय में आई और मशीन के उपयोग से लागत भी कम लगी। सहायक कृषि इंजीनियरों ने बताया कि जिले के किसानों की तैयारी धान की फसल-घाई, कृषि प्रबंधन एवं रबी फसल की हड्डी और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर रहे हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से किसान कम लागत एवं कम मेहनत में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।