खेल-में-सीखने की पहली: बाला कॉन्सेप्ट पर आधारित नर्सरी रेज़िडेंशियल से बेहतर तस्वीरें।

धमतरी – प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक प्रभावशाली, आकर्षक और बच्चों की सहज शिक्षा की प्रक्रिया के साथ-साथ धमतरी जिले में बाला (सीखने के साधन के रूप में भवन निर्माण) का उद्देश्य एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभर रहा है। यह पहली बार है कि केवल शिक्षण-सीखने की गुणवत्ता को बढ़ाया जा रहा है, बल्कि बच्चों को एक ऐसे आकर्षक माहौल से जोड़ा जा रहा है, जहां वे खेल-कूद में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।बाला कॉन्सेप्ट का मूल विचार यह है कि भवन स्वयं बच्चों का शिक्षक बन जाये। इस मॉडल में दीवारें, सबमशीन, एस्ट्रिच, रेज़िन, ज़ाबेथ तक कि बाहरी खुले स्थानों को भी शिक्षण के रूप में विकसित किया गया है। अक्षर, संख्याएं, रंग, आकार, मौसम, स्थानीय परिवेश से जुड़े चित्र, दिशा सूचक संकेत, सोख नापने के चार्ट जैसे कई तत्व सहज रूप से बच्चों तक ज्ञान पहुंचाते हैं। इन बच्चों में जिज्ञासा बहुरंगी है, स्मरण शक्ति बेहतर होती है और सीखने की प्रक्रिया सक्रिय एवं आनंददायक बन जाती है।इस अभिनव सोच को विचारधारा के रूप में देते हुए धमतरी जिला प्रशासन ने पशुपालन, महिला एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस) और 15वें वित्त आयोग के वित्तीय सहयोग से जिले में 81 बाला मॉडल औद्योगिक उद्यमों का निर्माण शुरू किया है। इनमें से 38 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष पर तेजी से कार्य जारी है। हाल ही में कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने विकासखण्ड धमतरी के ग्राम उड़ेना में निर्मित नवीन बालवाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया। लगभग 11.69 लाख रुपये की लागत से तैयार यह भवन न केवल आकर्षक है, बल्कि बाला कॉन्सेप्ट के सभी विशिष्ट उपकरणों को शामिल करते हुए सीखने का आदर्श वातावरण प्रस्तुत करता है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष से बात करते हुए शेष कार्य को भी निर्धारित समय सीमा में बेहतर गुणवत्ता के पूर्ण करने के निर्देश दिए।फ्लाइंगना की यह बैलवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्र में पूर्ण अधोसंरचना का उदाहरण प्रस्तुत करती है। केंद्र की दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, जीव-जंतु, वृक्ष-पौधों के साहित्य से लेकर मठ और भाषा वाले चार्ट तक रहस्यात्मक रूप से उकेरे गए हैं। मसौदे को अलग-अलग नस्लों और आकारों से हटा दिया गया है, जिससे बच्चे को प्राथमिकताएं और टुकड़ियों को आसानी से पहचाना जा सके। प्रोटोटाइप पर गिनती, कैटलॉग पर अक्षर और सीरियल पर दिशा संकेत उन्हें प्रतिदिन नई सीख प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो दृश्य-आधारित शिक्षा से तेजी से ज्ञान अर्जित करते हैं। बाला कॉन्सेप्ट के तहत बने इन अनचाहे लोगों से विशेष रूप से पिछवाड़े जनजाति कमर वर्ग के नवनिहाल बच्चों के खेल में ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।

शिक्षक श्री मिश्रा का मानना ​​है कि प्रारंभिक शिक्षा जीवन की मजबूत स्थापना है, और यह प्राथमिक बच्चों के लिए प्रेरणादायक, सुरक्षित और आकर्षण वातावरण तैयार करते हैं। बाला मॉडल बैलवाड़ी सेंटर में केवल बच्चों में पढ़ाई की रुचि नहीं बढ़ रही है, बल्कि माता-पिता को भी यह विश्वास है कि उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त हो रही है।धमतरी जिले की यह पहली बाला कॉन्सेप्ट को रियल प्रोजेक्ट पर उद्घाटित एक प्रेरक सफलता की कहानी है। यह मॉडल आने वाले वर्षों में पूरे प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के स्तर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और बच्चों के स्वर्णिम भविष्य की ठोस सूची के रूप में स्थापित किया जाएगा।