ग्रामीण जीवनस्तर में हुआ गुणात्मक सुधार सीइओ जिला पंचायत सुश्री रोमा श्रीवास्तव।
धमतरी – धमतरी जिला आज ग्रामीण विकास की नई मिसाल बन रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और बिहान जैसी योजनाओं ने यहां की ग्राम पंचायतों की तस्वीर ही बदल दी है। ग्रामीण स्तर पर सुदृढ़ हुई बुनियादी सुविधाओं की अधोसंरचना ने न केवल गांवों को नई पहचान दी बल्कि आमजन के जीवन में स्थायी बदलाव भी लाया।
मनरेगा से सशक्त होती पंचायतें – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत जिले के ग्राम पंचायतों में अब तक नया तालाब निर्माण कार्य, डबरी निर्माण, डबरी गहरीकरण कार्य, हैण्डपंप रिचार्ज कार्य, मिश्रित वृक्षारोपण कार्य, सामुदायिक कुंआ निर्माण कार्य, सिंचाई नहर नाली निर्माण कार्य, हितग्राही मूलक भूमि सुधार कार्य, नाला सफाई एवं पुनरूद्धार कार्य, तालाब गहरीकरण सह पचरी-पीचिंग कार्य, जल निकासी कच्ची नाली निर्माण कार्य, धरसा सड़क निर्माण कार्य, मिट्टी सड़क निर्माण कार्य, सी.सी. रोड निर्माण कार्य, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वर्मी कम्पोस्ट निर्माण कार्य, सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्य, ठोस अपशिष्ट तरल प्रबंधन कार्य, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, ग्राम पंचायत भवन निर्माण एवं प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्य में 90 दिवस का मजदूरी कार्य एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण हुआ।
इन निर्माण कार्यों ने ग्रामीण परिवेश को मजबूत किया जिससे न केवल पंचायत स्तर पर विकास हुआ बल्कि श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला। जिन मजदूरों को पहले रोजगार के लिए दूर-दराज़ जाना पड़ता था उन्हें अब अपने ही गांव में काम और सम्मानजनक आमदनी प्राप्त हो रही है। इससे उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आई और पलायन की समस्या पर भी नियंत्रण हुआ।
आवास योजना से मिली नई राह- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत जिले में हजारों परिवारों को पक्का घर मिला। जिनके सिर पर पहले छत नहीं थी या टपकते कच्चे घरों में दिन गुजरते थे वे आज सुरक्षित और गरिमामय जीवन जी रहे हैं। पक्के आवास ने न केवल सामाजिक सम्मान दिया बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार की सेहत और महिलाओं की सुरक्षा जैसी अनेकानेक समस्याओं से निजात मिली।
बिहान समूह से आत्मनिर्भर होती महिलाएं – जिले की महिलाएं बिहान समूहों के माध्यम से अपने सपनों को साकार कर रही हैं। इन समूहों से जुड़कर महिलाओं ने न केवल आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी पाया। सिलाई-कढ़ाई, खेती-किसानी, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से उन्हें नियमित आमदनी का स्रोत मिला। आज ये महिलाएं परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है और समाज में सशक्त पहचान बना रही हैं। इन्हीं बिहान समूहों से निकली कई महिलाएं आज “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती है। इसके पहले स्व सहायता समूह की महिलाएं घर-गृहस्थी चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करती थी। परंतु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने सब्जी उत्पादन, कुक्कुट पालन और मशरूम इकाई शुरू की। धीरे-धीरे समूह की महिलाओं ने सामूहिक मेहनत से लाखों की आमदनी हासिल की। आज वे सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमा रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल चुकी है।
अब वे दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। गांव की महिलाएं उन्हें “लखपति दीदी” कहकर सम्मान देती है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी बड़े सपनों को साकार कर सकती हैं।
इस संबंध में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव ने बताया कि-जिले में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और बिहान जैसे कार्यक्रमों से ग्रामीण जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार हुआ है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक परिवार आत्मनिर्भर बने और प्रत्येक ग्राम पंचायत विकास की राह पर आगे बढ़े।
आज जिले के हर गांव आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण अब योजनाओं को केवल लाभ के रूप में नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख रहे हैं। महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता, पक्के घरों में सुरक्षित जीवन और रोजगार से भरे गांव इस बात का प्रमाण है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन गांव की तकदीर बदल सकता है।
