मूसलधार बारिश में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं का प्रदर्शन, आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर निशाना।

महासमुंद – तेज बारिश भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के हौसले को कमजोर नहीं कर सकी। अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर जिलेभर की सैकड़ों महिलाओं ने नया रावणभाटा मैदान में एकजुट होकर राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। “आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिका संयुक्त मंच” के बैनर तले महासमुंद जिले के पांचों ब्लॉकों से महिलाएं जुलूस की शक्ल में मैदान पहुँचीं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।धरना स्थल से रैली निकालकर प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और प्रधानमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व सुधा रात्रे, द्रोपती साहू और सुलेखा शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को शुरू हुए 50 वर्ष हो चुके हैं,लेकिन कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। न ही उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी गई है। उनकी आठ प्रमुख मांगों में राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानदेय में बढ़ोतरी (कार्यकर्ताओं के लिए 18,000 रुपये व सहायिकाओं के लिए 10,000 रुपये), सेवानिवृत्ति पर पेंशन-ग्रेच्युटी, ईएसआईसी व पीएफ का लाभ,पदोन्नति-नियमितीकरण की नीति, त्यौहार/महंगाई भत्ता, आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन हेतु पर्याप्त बजट और अनुचित बर्खास्तगी-उत्पीड़न पर रोक शामिल हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर तुरंत निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी चुनाव में सरकार को इसका जवाब देना होगा। साथ ही संयुक्त मंच की रणनीति के तहत निकट भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे बड़े आंदोलन किए जाएंगे।आज के आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं, जिनमें सुधा रात्रे, द्रोपती साहू, सुलेखा शर्मा, तोषी गोस्वामी, संतोषी यादव, हाजरा, निशा खान, भारती ठाकुर, सुशीला ठाकुर, रामेश्वरी धृत, अन्नपूर्णा वैष्णव, रेणु निराला, हेमलता साहू, जुगेंद्री महापात्र, बबीता खांडे, उषा चौहान सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थीं।