धमतरी /राजशेखर – कहा जाता है कि जहाँ चाह है वहाँ राह है। यदि लक्ष्य स्पष्ट है तो लक्ष्य प्राप्ति के कई तरीके मिल ही जाते हैं।सेजेस सिंगपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं को पूर्णतः क्रियान्वित करने का भरसक प्रयास विद्यालय एवम समुदाय के परस्पर सहयोग से जारी है। शिक्षा नीति की प्रमुख अनुशंसा है कि बच्चे हायर सेकेंडरी के पश्चात उच्च शिक्षा,व्यावसायिक शिक्षा या किसी न किसी प्रतियोगी परीक्षा में संलग्न हो। बच्चे कॉम्पिटीटर बने। ग्रामीण क्षेत्र में यह तभी सम्भव है जब बच्चों को इस सम्बंध में उचित मार्गदर्शन के साथ साथ पर्याप्त संसाधन मिले। सेजेस सिंगपुर में इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आम पालकों से विचार विमर्श एवम उनकी सहमति पश्चात पुस्तकालय को ” थाती ” बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों में टेलेंट होने के बाद भी शहर के महंगे कोचिंग की फीस जुटाने की क्षमता नहीं होती। बच्चे प्रतियोगी परीक्षा से सम्बंधित महंगी पुस्तकें नहीं खरीद पाते, फलतः ऐसे बच्चे प्रतियोगिता से ही दूर छिटक जाते हैं।
इसी समस्या का समाधान निकालने की कोशिश सेजेस सिंगपुर के प्राचार्य ,शिक्षक एवम पालक कर रहे हैं। जब विद्यालय के प्राचार्य डॉ व्ही पी. चन्द्रा ने पालकों के समक्ष इस एक लाइन का प्रस्ताव ” हर माता पिता को अपने बच्चे के जन्म दिन पर एक प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तक विद्यालय को साल में एक बार देनी है। ” बदले में ऐसे बच्चों को पौने चार सौ प्रतियोगी पुस्तकें मिलेंगी ” आम पालकों में उत्साह का संचार हो गया। सभी पालकों ने एक मतेन प्राचार्य के प्रस्ताव पर मुहर लगा दिया। बैठक में ही इसके सफल क्रियान्वयन हेतु शिक्षक ,पालक तथा छात्र संघ परिषद के बच्चों को शामिल कर एक समिति गठित की गई। व्याख्याता रामभुवन मारकोले को इसका संयोजक तथा जितेंद्र ध्रुव शिक्षक को सह संयोजक बनाया गया है। छात्र संघ परिषद के चार बच्चों को इस समिति के सदस्य के रूप में नामित किया गया है।यह ग्रामीण जनों के संकल्प से स्थापित पुस्तकालय ‘ थाती ‘ को अब नॉलेज सेंटर के रूप में प्रसिद्धि मिलनी वाली है। इस ‘थाती ‘ को समृद्ध करने के शिक्षक घर घर जाकर पालकों से सम्पर्क कर रहे हैं। पालकों से निवेदन किया जा रहा है कि वे अपनी शादी के साल गिरह में, माता पिता की स्मृति में , जन्म दिन पर ,किसी सामाजिक उत्सव के बहाने प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तकें देकर विद्यालय के पुस्तकालय को ‘ थाती ‘ बनाएं। एस एम डी सी ,पालक , सेजेस के प्राचार्य एवम समस्त शिक्षकों की पहल से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए यह ग्रन्थालय नॉलेज सेंटर के रूप में कार्य करेगा। इसे समृद्ध बनाने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों,तथा आम पालकों के लिए अवकाश के दिनों में भी इसे खोला जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सकें। पालकगण विद्यालय के प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार करते हुए अपने बच्चों के जन्म दिन पर विद्यालय को पुस्तक भेंट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह ‘थाती ‘ सिंगपुर जैसे पिछड़े क्षेत्र के बच्चों के विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।
सेजेस सिंगपुर का ‘ थाती ‘ बनेगा नॉलेज सेंटर: कुछ दिनों के बाद रविवार को भी दिखेंगे बच्चे।
