महासमुंद – छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रतिशोध की नीति बताया है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र में बैठी भाजपा सरकार की विपक्ष की आवाज को कुचलने की तानाशाही कोशिश है। श्री चंद्राकर ने कहा कि भाजपा अपनी नीतिगत असफलताओं और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए विपक्षी नेताओं को ईडी और आईटी जैसी केंद्रीय एजेंसियों केमाध्यम से डराने-धमकाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी भाजपा सरकार की नाकामियां सामने आती हैं, विपक्षी नेताओं पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन श्री बघेल रायगढ़. जिले के तमनार में अडाणी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों की अवैध कटाई और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाने वाले थे। भाजपा को यह डर था कि भूपेश बघेल के खुलासे से उसकी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी, इसी वजह से उनके निवास पर ईडी की छापेमारी की गई। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हसदेव अरण्य और तमनार जैसे क्षेत्रों के हरे-भरे जंगलों को कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले कर दिया है, और जब ग्रामीणों एवं आदिवासियों ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ दमनकारी रवैया अपनाया गया—जैसे लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और उत्पीड़न।उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस नेताओं द्वारा तमनार की वास्तविक स्थिति का दौरा करने और सच्चाई उजागर करने के बाद भाजपा घबरा गई थी। अडाणी से भाजपा के गहरे संबंधों को छुपाने के लिए ईडी का उपयोग किया जा रहा है। चंद्राकर ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी पूर्व मंत्री कवासी लखमा, विधायक देवेंद्र यादव सहित कई कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम है जनता की आवाज बनकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना, लेकिन भाजपा सवालों से डरती है और जवाब देने के बजाय ईडी-आईटी का सहारा लेकर विपक्ष को झूठे मामलों में फँसाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता भाजपा की इन तानाशाही कार्रवाइयों को देख रही है और समय आने पर इसका करारा जवाब देगी।
