एक वर्ष, एक लाख : जिले में औषधीय औषधालय की खेती की प्रक्रिया शुरू।

80 अनारक्षित भूमि पर फार्मास्युटिकल कोचिंग की खेती के लिए स्व-लक्ष्यालय से अनुबंध।

खेती शुरू हुई चार लाख गाय की प्रारंभिक राशि भी मिली।

कलेक्टर बोले-ऐतिहासिक दिवस, इससे किसान-महिलाओं की आय विविधता।

धमतरी – कलेक्टर  अविनाश मिश्रा की पहली प्रस्तुति आज धमतरी जिले में औषधीय औषधालय की प्रक्रिया शुरू हुई। अगले एक सप्ताह में 21 कश्मीर में 80 आश्रम भूमि पर लगभग 38 स्व सहायता आदिवासियों की महिलाएं खास, ब्राम्ही और पचौली के उपाय रोपेंगी। कृषकों सहित महिला स्व सहायता समुदाय के सदस्यों की आय बढ़ाने में औषधीय औषधालय की खेती में विशेष प्रारंभिक मुद्रा जारी की जा रही है। औषधीय की खेती से लेकर विशेषज्ञ ने एक साल में 75 हजार रोगियों से लेकर एक लाख रकबे तक के शुद्ध मुनाफे का अनुमान लगाया है। जिले में इस खेती के लिए औषधीय पादप बोर्ड की सहायता ली जा रही है। बोर्ड के सीईओ श्री जे.सी. राव ने आज कुरूद में एक सौ से अधिक महिलाओं को औषधीय औषधालय की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इसके लिए अनुदान, प्रशिक्षण, उपचार आदि के बारे में भी बताया। सीईओ ने नियुक्त किए गए महिलाओं को औषधीय उपचारों के लिए मंजूरी दे दी है। इस दौरान तीन महिलाओं ने कॉनटेक्ट फॉर्मिंग के लिए औषधीय बोर्ड से सहमति प्राप्त की। इस विद्यालय में जिप जिला पंचायत श्रीमती रोमामित्र सहित कृषि, उद्यानिकी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी भी उपस्थित हैं।जिले में कुरुद और मगरलोड विकासखंड में पहले चरण में खास 68 ओक रकबे में, ब्राम्ही 9 नोक रकबे में और पचौली 3 लंगर रकबे में जुड़ेंगे। 21 ग्राम परियोजना के 21 क्षेत्र के 38 स्व सहायता समुदाय की लगभग 380 महिलाएँ यह खेती करेंगी। जिले में पहले चरण में औषधालय की खेती की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। इसके अनुभव के बाद निजी किसानों के परामर्श में भी औषधीय फसलें लगवाएं। पहले चरण में नारी, गुडगुडा, परखंडा, परसवानी, मंदरौद, सिरसिडा, बोरसी, फाइटर, सोनेवारा, कपालफोडी, मेघा, गिरौद, सौंगा, बुडेनी, कंडेल, बलियारा, झुरानवागांव, सारंगपुरी, देवपुर, सोरम और पोटियाडीह में महिला स्व सहायता समूह खास, ब्राम्ही और पचौली की खेती मठ। अगले एक सप्ताह में पूरे जिले में चिन्हाकित स्थानों पर प्लाटों का सोलोमन शुरू हो जाएगा।

कलेक्टर बोले-ऐतिहासिक दिवस, इससे किसान-महिलाओं की आय विविधता

कलेक्टर  अविनाश मिश्रा ने आज के दिन धमतरी जिले के लिए ऐतिहासिक बताया कि उन्होंने कहा कि महिला प्लास्टिक को औषधीय खेती से जोड़ने का सफल प्रयास एक तरफ से इस खेती को बढ़ावा देना है तो जरूरी है, इसके साथ-साथ महिला संरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों को भी आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि औषधीय औषध विज्ञान की खेती कम लागत में अधिक अधिग्रहण वाली है। दवा, मसाला, खाद-दवाई आदि का खर्चा बहुत कम है, लेकिन इसकी मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है। इन प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित होने के कारण महिलाओं को नीचा दिखाया जाता है, महत्व दिया जाता है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

फार्मास्युटिकल पादप बोर्ड, तकनीकी दिशानिर्देश, अंतिम रूप से प्राप्त खरीद-फरोख्त द्वारा उत्पादित सामान की आपूर्ति

कुरूद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आज स्व एडाबाइबिलिटी की महिला मंडल को औषधीय खेती की खेती के बारे में तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। छात्रावास में ही महिलाओं के लिए पासपोर्ट प्लाट पर भी दी गयी जानकारी। उन्हें खेत तैयार करने से लेकर प्रमाणित के बीच की दूरी, दो लेन के बीच की दूरी, आवश्यक खाद-उर्वरक, सींच, निंदाई, गुड़ाई के बारे में विस्तार से बताया गया। औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ श्री राव ने महासमुंद जिले में औषधीय की खेती कर रहे किसानों के मार्गदर्शन में भी धमतरी-कुरूद की महिलाओं को प्रशिक्षण यात्रा पर ले जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि औषधीय खेती के लिए खेत तैयार करने से लेकर फसल की कटाई-प्रसार तक बोर्ड के विशेषज्ञ महिला फिजियोलॉजी की सहायता लेंगे। श्री राव ने यह भी बताया कि औषधीय औषधालयों के उपजी-निर्माताओं को बाजार में उपलब्ध कराने के लिए भी बोर्ड पूरी मदद करेगा। कॉन्टैक्ट फॉर्मिंग के तहत फसल लगाने वाले किसानों के मार्गदर्शन से ही बोर्ड की सहमति प्राप्त खरीददार इस उपज को खरीदता है। इसके लिए किसानों-महिलाओं को किसी बाजार में जाने या बाजार की तलाश की जरूरत नहीं है। वर्कशॉप में आज बोर्ड के अनुबंधित खरीददार छत्तीसगढ़ स्टेरिया एंड प्लांट्स, सुगंधा एरोमैटिक्स, ईस्टा प्लांट्स और विराध्या इंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि भी मौजूद हैं। सोसायटी ने कुरुद विकासखंड की देवी महिला कलस्टर ऑर्गनाइजेशन चर्रा को 35 एकड़ रकबे में खास की खेती करने के लिए शुरुआती राशि के रूप में एक लाख 65 हजार मूंगफली का धनादेश दिया। इसी तरह धमतरी विकासखंड के आंचल महिला कलस्टर ग्रुप संबलपुर को एक लाख 35 हजार तेंदुए और मैग्लोड विकासखंड के अनंत महिला कलस्टर ग्रुप भरदा को एक लाख 35 हजार तेंदुए की राशि का धनादेश दिया गया है।

स्व-ऑपरोजगार की महिलाओं में उत्साह, बोलीं-नया काम करके लाखपति

फार्मास्युटिकल की खेती को लेकर महिला एस.एल.ओ.एस.एल.टी. सोसायटी के सदस्यों में भारी उत्साह देखा गया। आज की कार्यशाला में महिलाओं ने बढ़ाई-चढ़ाई भागीदारी की। औषधीय खेती की पूरी जांच पड़ताल। महिलाओं ने विशेषज्ञ से औषधीय औषधालय की खेती के बारे में शंका-समाधान भी किया। औषधीय औषधीय से लाभ, खेती की तकनीक, बाजार से लेकर विपणन तक के बारे में महिलाओं ने विशेषज्ञ से छोटी से छोटी जानकारी ली।महिला समूह की सदस्या श्रीमती दिलेश्वरी साहू ने कहा कि इसके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। समूह में केवल पापड़, बड़ी, साबून, बांसकला या फिर सेंट्रिंग, चंदन उत्पादन, रंग-गुलाल बनाना तक ही सीमित थे। औषधीय की खेती के नए काम से लेकर सभी को नई-नई जानकारियां मिल रही हैं। एक अलग तरह की खेती का अनुभव हो रहा है। हम सभी इसकी तैयारी कर रहे हैं और जल्द ही दिखाएंगे कि औषधीय औषधीय खेती के इस नए काम से लक्षपति सामने आएंगे।