( रेलवे ,फारेस्ट की जमीन पर घर बना रहे लोग कहाँ से लाएंगे जमीन के दस्तावेज )
( कुछ माह पूर्व जिन प्रतिनिधियों को जनता ने भेजा था पालिका उस पालिका से ही मिल रहा नोटिस )
किरंदुल – एक ओर जहाँ रेलवे की जमीन पर दशकों से काबिज निवासियों को रेलवे प्रशासन द्वारा जमीन खाली करने के नोटिस देने के बाद आया तूफान थमा नहीं है तो वहीं दूसरी ओर किरंदुल नगर पालिका परिषद के द्वारा रेलवे और फारेस्ट की जमीन पर वर्षों से काबिज लोगों के द्वारा बनाये जा रहे गरीबो के आशियाने को निर्माण कार्य को बंद कर तीन दिवस के अंदर जमीन से सम्बंधित दस्तावेज पेश कर किरंदुल पालिका से भवन निर्माण कार्य के लिए भवन अनुज्ञा पत्र लेने के बाद ही भवन निर्माण कार्य को प्रारंभ करने की कार्यवाही से पुनः नगर के लोगो मे आशियाना को लेकर दहशत का माहौल बना हुआ है । गौर तलब है कि कई सालों पूर्व पूरा नगर ही तत्कालीन परिस्थितियों के हिसाब से बस चुका था यह भी विशेष है कि उस समय लोगों को यहां बसने व व्यवसाय करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था,अब वही जनता रेलवे की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं कभी वन विभाग तो कभी रेलवे लोगों को बेदखल करने पर आमादा है तो दूसरी तरफ अब जनहित के लिए बने निकाय नगर पालिका परिषद भी उक्त अभियान में जनता के विरुद्ध कदमताल करने में जुट गई है,किरंदुल में बसे व्यापारी एवं आम जनता में 95 प्रतिशत लोगों के पास पट्टा नहीं है तो वे भवन अनुज्ञा के लिए किस आधार पर निकाय में आवेदन लगा सकते हैं,जनप्रतिनिधियों को प्रथम पट्टा वितरण पर केंद्रित रहना चाहिए न कि आम लोगों को परेशान करने के लिए नोटिस और चेतावनी आदि का दांव अपनाना चाहिए । खैर देखने लायक बात यह होगी कि जिन जनप्रतिनिधियों को कुछ माह पूर्व ही जनता ने विजय श्री दिलवाकर पालिका कार्यालय की सियासी कुर्सी पर बैठाया था उस ही कार्यालय से उस ही जनता को नोटिस मिलने पर नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया क्या होगी ।
