प्रमोद दुबे
महासमुंद – शहर के कॉलेज रोड स्थित स्वाध्याय केंद्र में बुधवार को एक राष्ट्र एक चुनाव पर छत्तीसगढ़ महतारी सेवा समिति द्वारा संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक राष्ट्र एक चुनाव पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम के वक्ता गुलाब ठाकुर ने संवैधानिक पक्ष को रखते हुए कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव समृद्धशाली और विकसित भारत के नीव के रूप में कार्य करेगी। साथ ही इससे संसाधन, समय जैसे अन्य आवश्यक चीजों की बचत भी होगी। आज देश में अलग-अलग चुनाव होने के कारण हर वर्ष या वर्ष में 2 से 3 बार चुनाव होते हैं। इसलिए एक राष्ट्र एक चुनाव होना चाहिए। एक राष्ट्र-एक चुनाव की अवधारणा का उद्देश्य मतदाताओं को एकजुट करने में क्षेत्रवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता के विभाजनकारी प्रभाव को कम करना है। ये मौजूदा समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके और एकीकृत चुनावी एजेंडे को बढ़ावा देकर, एक साथ चुनाव संकीर्ण हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।अन्य वक्ताओं ने भी एक राष्ट्र एक चुनाव को बताया राष्ट्र की जरूरतएक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर वक्ता देवेंद्र दुबे ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से राष्ट्र को कई तरह ही हानि होती है। एक राष्ट्र एक चुनाव तर्कपूर्ण है। यह निर्णय अगर लिया जाता है तो यह स्वागत योग्य होगा। बार बार चुनाव, प्रशिक्षण, पोस्टिंग, अचार संहिता से विकास कार्य तो बाधित होता ही है, कर्मचारी भी खिन्न रहते हैं। एक चुनाव से विकास को गति मिलेगी।
वक्ता संदीप दीवान ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव होने से कई बार लगने वाले आचार संहिता से राहत मिलेगी। लंबे समय तक आचार संहिता होने के कारण विकास संबंधी कार्य धीमी हो जाती है। एक राष्ट्र एक चुनाव होने से विकास की रफ्तार और बढ़ जाएगी। केवल सरकार ही नहीं पूरे देश को इस बारे में विचार करना होगा और इसका समर्थन करना होगा।वक्ता भूपेंद्र राठौर ने कहा कि भारत एक संघर्षशील राष्ट्र है, हमारा देश लोकतंत्र को पोषण देने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव का विरोध करना अर्थात संविधान का विरोध करना है। एक राष्ट्र एक चुनाव हमारे देश के लोकतंत्र के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। अलग अलग चुनाव होने से लगातार समस्याएं आती हैं। इनसे बचने के लिए एक राष्ट्र एक चुनाव लागू होना चाहिए। आजकल चुनावों में होने वाले खर्च लागतार बढ़ रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा प्रत्येक चुनाव के लिए प्रत्याशियों की खर्च सीमा तय की गई है। फिर भी लोक लुभावन के कारण प्रत्याशी अप्रत्याशित खर्च करते हैं।एक राष्ट्र एक चुनाव होने से इस पर भी अंकुश लगेगा।वक्ता अखिलेश लुनिया ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव की जानकारी आमजन में काफी कम है, इसलिए इस विषय को हर मोहल्ले हर गली और हर घर तक पहुंचाना है। इससे एक राष्ट्र एक चुनाव की मांग को काफी जनसमर्थन भी प्राप्त होगा।
