ग्रामीण प्रतिभा की उड़ान: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से डॉ. हेमन्त कुमार को कीट विज्ञान में पीएचडी की अद्वितीय उपाधि।

छत्तीसगढ़ के प्रथम व्यक्ति डॉ.हेमंत कुमार साहू नारधा को मिला कीटविज्ञान में पीएचडी की उपाधि।

मगरलोड – छत्तीसगढ़ के एक ग्रामीण परिवेश पले बढ़े मगरलोड ब्लॉक के ग्राम नारधा विकासखंड-मगरलोड, जिला-धमतरी से आने वाले डॉ. हेमंत कुमार साहू पिता डॉ रामकृष्ण साहू के पुत्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से कीट विज्ञान में पीएचडी पूरी कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वे आज तक इस प्रतिष्ठित संस्थान से कीट विज्ञान में पीएचडी प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार और गांव को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

हाल ही में आयोजित तिरसठवाँ दीक्षांत समारोह में, उन्हें यह उपाधि केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, कृषि राज्य मंत्री श्री राम नाथ ठाकुर, आईसीएआर-आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव और संस्थान की डीन डॉ. अनुपमा सिंह की उपस्थिति में प्रदान की गई। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक और शिक्षाविद भी मौजूद थे।डॉ. हेमंत कुमार का सफर संघर्ष और कड़ी मेहनत की मिसाल है। उनके पिता श्री रामकृष्ण साहू किसान और सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवक हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती कृष्णा साहू एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, कुरुद, धमतरी से प्राप्त की। इसके बाद, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से कृषि में बी.एससी. और कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरु से कीट विज्ञान में एम.एससी. पूरी की।डॉ. कुमार के परिवार में शिक्षा और वैज्ञानिक उपलब्धियों का विशेष महत्व है। उनके भाई, इंजीनियर सोमनाथ साहू, गुजरात सहकारी दुग्ध महासंघ, आनंद, गुजरात में डेयरी केमिस्ट और गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने डेयरी रसायन में एम.एससी. की उपाधि प्राप्त की है।वर्तमान में, डॉ. हेमंत कुमार बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची में सहायक प्रोफेसर-सह-कनिष्ठ वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) के रूप में कार्यरत हैं। वे अपने शोध और शिक्षण कार्य के माध्यम से कीट विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर वैज्ञानिक योगदान की ऊंचाइयों तक पहुंचने का एक शानदार उदाहरण है।डॉ. कुमार की इस सफलता से न केवल उनके परिवार और गांववासी गर्वित हैं, बल्कि यह ग्रामीण भारत की प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की भी प्रतीक है। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि समर्पण, परिश्रम और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। इस उपलब्धि में बधाई देने के लिए जनपद सदस्य तिलोत्तमा प्रेमानंद साहू, सरपंच पुष्पा राम प्रसाद देवदास,पटिला ओम कुमार निषाद, रिटायर्ड आर्मी रोहित साहू, लक्ष्मीनाथ पटेल, पंच उत्तरा साहू, डागेश्वर साहू, राधा साहू, टानिक साहू,राधे साहू इंद्रकुमार पटेल, मोहित साहू, एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।