जिला कलाकार ‘बस्तर पंडुम’ का भव्य उद्घाटन।

विदेशी की लोक संस्कृति को मिल रही है नई पहचान: वन मंत्री श्री कश्यप।

पारंपरिक लोकनृत्य, वीरों के रंगारंग नायक; जन पारंपरिक व्यंजन, आभूषण, पोशाक और शिल्पकला का भव्य प्रदर्शन हुआ।

कोंडागांव – जिला सांस्कृतिक ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में आज कोंडागांव के बैजोरियम में हुआ। इस आयोजन में जिले के पांचों विकासखंडों से आए लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों को मंच पर जनजातीय संस्कृति को जीवंत बनाया।

मुख्य अतिथि वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वन्यजीवों की पहचान जनजातीय गीत-संगीत, नृत्य और रेस्तरां से है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस प्रतिष्ठित लोकसंस्कृति को ‘बस्तर पंडुम’ के माध्यम से संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समुदाय के बीच छत्तीसगढ़ दलितवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रही है, जिससे विकास के नए द्वार खुलेंगे और वन्यजीवों की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान मिलेगी।

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल कोदो, कुटकी और रागी जैसे पोषक अनाज अब राष्ट्रीय स्तर पर बेचे जा रहे हैं। उनका मानना ​​है कि ‘बस्तर पंडुम’ नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति को समझने और अपनाने का अवसर देगा।कलेक्टर श्री श्रीकांत दुदावत ने दी जानकारी में बताया गया है कि जिला स्तरीय समारोह में विकासखंड स्तर पर चयनित आठ विधान सभाओं के महोत्सव में शामिल हुए हैं। यहां से अप्रेल नामांकन नामांकन नामांकन प्रतियोगिता में भाग 1. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पहल से पर्यावरण की संस्कृति को नई पहचान दे रही है।नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने कहा कि वन्यजीव पांडुम के माध्यम से हमारी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रारंभिक राज्य शासन किया जा रहा है। इससे आइसलैंड की लोक संस्कृति को नई पहचान के साथ सम्मान भी मिलेगा। पूर्व सहयोगी श्री सेवकराम नेता ने भी इस पहल में कहा था कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयास से इस महोत्सव में पर्यावरण की संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर जनजातीय आभूषण, शिल्पकला, पारंपरिक आभूषण और वेशभूषा का भव्य प्रदर्शन किया गया। वन मंत्री श्री कश्यप ने विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और पहाड़ों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। उन्होंने तिखुर और अमारी शर्बत का आनंद लिया, जबकि कलेक्टर श्री दुदावत ने भी विभिन्न जनजातीय मॉडलों का स्वाद चखा।पंडुम के पारंपरिक व्यंजन स्टॉल में कुमड़ा बड़ी, बोहार भाजी, जीरा भाजी, हरवा, फुलाद, कांडा, कोलयारी भाजी, इत्ता पुल्ला (अमत सागा), जिमी कांडा, डांग कांडा सहित पेय पदार्थ में सलफी, तिखुर येर, जीरा गुंडा, अमारी शरबत, गोरा जावा (माडिया पेज) और अन्य जन प्रसिद्ध पेय पदार्थ स्टॉल में शामिल हैं। इसी प्रकार के पारंपरिक आभूषणों में वन्यजीवों के पारंपरिक आभूषण जैसे सुता, बांधा, आरपी माला, खिनवा, डोरा, कलंगी, कौड़ी माला, पुतरी, करधन, बहुता, ढघेर, लुरकी, ऐथी, मुंडरी, फूली, पटा, बिछिया आदि का प्रदर्शन किया गया।इस अवसर पर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष श्री हीरासिंह नेताम, नगर पालिका के उपाध्यक्ष श्री जसकेतु सेंडी, श्री दीपेश अरोरा सहित स्थानीय सामुहिक समुदाय और जनजातीय समाज के प्रमुखजन उपस्थित थे।