परिजनों ने हॉस्पिटल के विरुद्ध राज्यपाल कलेक्टर एसपी से की उचित जांच एवं कड़ी कार्रवाई की मांग ।
परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधक पर घोर लापरवाही का लगाया आरोप।
बच्ची की मौत के बाद परिजनों को बहला-फुसलाकर शक्ति भेज दिया गया
चांपा – चांपा नगर मे स्थित जे.जी.एम. अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां जिला शक्ति निवासी मनीष कुमार सार्वडिया और उनकी पत्नी मनीषा सार्वडिया की डेढ़ साल की मासूम बेटी अंशिका सार्वडिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और चिकित्सा व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही को उजागर किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मनीष कुमार अपनी पत्नी और बीमार बेटी अंशिका के साथ बेहतर इलाज की उम्मीद में शक्ति से चांपा के जे.जी.एम. अस्पताल पहुंचे थे। दोपहर करीब 2:40 बजे उन्होंने अस्पताल में अपनी बेटी को भर्ती कराया। लेकिन गंभीर बीमार बच्ची को देखते हुए भी अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने लापरवाही बरती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलाज के दौरान अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. सुमित गुलाबानी अस्पताल में मौजूद नहीं थे। बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में बच्ची को ब्लड चढ़ाया गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। जब स्थिति गंभीर हो गई, तब आनन-फानन में डॉ. गुलाबानी पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम अंशिका ने दम तोड़ दिया। मासूम अंशिका की असामयिक मृत्यु से उसके माता-पिता गहरे सदमे में हैं। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधक पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय रहते सही देखरेख और इलाज मिला होता, तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी। परिजनों का कहना है कि बच्ची को बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ब्लड चढ़ाना, अस्पताल में महत्वपूर्ण डॉक्टर की गैर-मौजूदगी और समय पर सही इलाज न मिल पाना, ये सभी लापरवाही के स्पष्ट प्रमाण हैं। इसके चलते परिजनों ने सक्ती कलेक्टर, सक्ती पुलिस अधीक्षक, सक्ती पुलिस एसडीओपी और थाना प्रभारी के पास जाकर शिकायत दर्ज कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ताकि भविष्य मे ऐसी गलती दोबारा ना हो सके। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। परिजनों के अनुसार, अस्पताल के प्रबंधकों और कुछ बाहरी दलालों की मिलीभगत से मामले को दबाने की कोशिश की जा रही थी। बच्ची की मौत के बाद परिजनों को बहला-फुसलाकर शक्ति भेज दिया गया, ताकि वे ज्यादा हंगामा न कर सकें। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले की जानकारी लेने डॉक्टर सुमित गुलाबनी को फोन लगाया गया, लेकिन डॉक्टर ने फोन तक नही उठाया। इससे साफ पता चलता है कि अस्पताल प्रबंधक की लापरवाही से ही बच्ची की जान चली गई। अब देखना बाकी है कि अस्पताल प्रबंधक पर क्या कारवाही होती है।
