ग्राम खमोडगी में विकासखंड राष्ट्रीय प्रतियोगिता का शुभारम्भ आज से।
जपानीस संस्कृति हमारी वास्तविक पहचान, अपने पूर्वजों को छोड़ना बहुत जरूरी : मान्यवर श्री नेताम
उत्तर कांकेर – प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आदिवासियों की लोक संस्कृति, आदिवासियों, पोशाकों, शैली और लोक नृत्यों सहित विभिन्न विधाओं से आम जनमानस के दर्शन के उद्देश्य से “बस्तर पण्डुम” नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी तारतम्य में आज कांकेर ब्लॉक के ग्राम खमोढोड़गी में विकासखंड नेशनल स्टॉकहोम में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर नेता श्री आशाराम नेता उपस्थित थे।ग्राम खंभोड़गी में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता ने कहा कि प्रदेश के मुखिया श्री विष्णुदेव साय ने आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा और विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन किया है। उन्होंने आगे कहा कि पुरातत्व के जो पत्थर हैं, उन्हें संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए प्रदेश सरकार विशेष प्रयास कर रही है। नेता ने कहा कि जेजेपी संस्कृति ही हमारी वास्तविक पहचान है, अपने मित्र परंपरा को छोड़ना बहुत जरूरी है, इसलिए मछुआरों की भावी पीढ़ी जो धीरे-धीरे अपनी प्राचीन परंपरा और खलों को खोती जा रही है, उसकी पुनः स्थापना हो सकती है। इस अवसर पर आमंत्रित पुजारी श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने उद्बोधन में कहा कि कांकेर जिले में तीर्थ के प्रवेश द्वार कांकेर जिले में जनजाति की संस्कृति की उत्कृष्ट पहचान है। उन्होंने आगे कहा कि यहां की प्राचीन रीति-रिवाजों, धारणाओं और खात्मों को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम के तहत सहेजने के लिए पूरे द्वीपसमूह में आयोजित किया जा रहा है। कलेक्टर ने उपस्थित लोगों से कहा कि आदिवासी संस्कृति की उत्कृष्ट स्थापत्य कला को संजोकर रखना सभी की जिम्मेदारी है।
पारंपरिक आभूषण व आभूषणों की रही धूम
उल्लेखनीय है कि ‘बस्तर पंडुम’ के विकासखंड बौद्धिक कार्यक्रम में विभिन्न आदिवासी कलाकारों द्वारा प्राचीन लोकगीतों पर आधारित कलाकारों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें धनकुल, डंडा नाच, गोटुलपाटा के अलावा विभिन्न वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन शामिल था। इसके अलावा स्टॉलों में जन पारंपरिक पोशाकें और पुस्तिकाओं का भी प्रदर्शन किया गया, जिनके अनुयायी श्री नेताओं सहित कलेक्टर श्री क्षीरसागर, जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी और साधारण साम्यवादियों ने किया। इस दौरान ग्रुप की महिलाओं ने वन्यजीवों के पारंपरिक आभूषण हंसली, सेप्टो, ऐंठी, चुटकुल, चूड़ा, करधन, कौड़ी माला, कौड़ी गजरा, झलिंग, खोपा खोंचनी, बटकी खिनवा, बनुरिया, पारकड़ा, मचपिन, रूपया मंगल, पनिया, फुंडरा, टैनेर, झोबा, नेर्क, सिहारी बीजमाला, लया-लयोर राजसी पारंपरिक आभूषण गोदना का भी प्रदर्शन किया। इसी तरह के स्वादिष्ट व्यंजन के स्टॉल में गुडचिंडवा, पुडगा, अकीरोटी, सलफी, जिर्रा शर्बत, इमली (हिट्टा) मछल, कोडेंग घुघरी, गोरा जावा, अमेट, जिमीकांदा सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का प्रदर्शन जंगो रायतार महिला समूह अन्नपूर्णापारा और सोनी-रूपई गोवाना समूह की महिला मित्र कला पोया, नमिता वट्टी, शकुंतला द्वारा किया गया। साथ ही कीजियन संस्कृति पर आधारित कई लोक नृत्य, लोकगीत और जनजातीय पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य मत्स्य विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, कांकेर के पूर्व विधायक श्री इंस्टिट्यूटपाल शोरी सहित जिले के स्तर के सानिध्यगण उपस्थित रहे।इसके अलावा आज नरहरपुर विकासखंड के ग्राम देवगांव, अंतागढ़ के ग्राम पठारीखोदरा और कोयलीबेड़ा विकासखंड में एडोयमेंट मैदान में ब्लॉक स्मारक ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं के प्रतिनिधि और विद्वान शामिल हुए। इसी तरह रविवार 19 मार्च को चारामा के ग्राम भिरौद में और 20 मार्च को भानु प्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम कराठी में और दुर्गूकोंदल के ग्राम पंचायत खुटगांव के अशिक्षित भवन में विकासखंड जातीय पंडुम का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार आगामी 26 मार्च को कांकेर के ग्राम सिंगारभाट में जिला नौसैन्य नाविक पंडुम का आयोजन किया जाएगा।
