एनटी पोचिंग स्क्वायड ने विलुप्त प्रजाति उड़न गिलहरी,बड़ी गिलहरी (रतूफा इंडिका)के छह शिकारी को भेजा जेल।
गरियाबंद – सीता नदी टाईगर रिजर्व के रिसगांव परिक्षेत्र में एंटी पोचिंग स्क्वायड की टीम ने 25 नवम्बर को एक बड़ी कार्यवाही की है,विश्व में भारत और बुडलैंड मु पाये जाने वाली गिलहरी के विशेष और विलुप्त प्रजाति उड़न गिलहरी और बड़ी गिलहरी (रतूफा इंडिका)के शिकार में पांच आरोपीयों को जेल भेज दिया है एंटी पोचिंग की टीम हारी निगरानी में गश्ति पर निकले थे और पकड़ा गये विलुप्त प्रजाति के गिलहरी के शिकारी पकड में आ गये।वनविभाग के एंटी पोचिंग स्क्वायड की टीम को जाता देख आरोपी भाग रहे थे की टीम को शक हुआ पिछाकर पकड़ने बाद पूछताछ में पता चला आरोपीयों ने शिकारी कुत्ता के मदद से गुलेल से गिलहरी के विलुप्त प्रजाति के अलावा हिरण का शिकार किये है। एंटी पोचिंग की टीम ने जिन छह आरोपियों को।
कैसे होता है भारतीय उडन गिलहरी का आदत व्यवहार?
यह प्रजाति भारत के लिये स्थानिक है यह शिकारियों से बचने के लिये 11मीटर अर्थात 36 फीट औसत ऊंचाई वाले पेड़ों पर घोंसला बनाती है।यह 6 मीटर अर्थात 20फीट छलांग लगाकर एक पेड़ से दूसरे पेड पर जाती है।खतरा महसूस होने पर पेड़ों पर ऐसे चिपक जाती है उल्लू और तेंदुआ जैसे शिकारी पक्षी समझ बैठता है।यह ज्यादातर सुबह और शाम के शुरूवाती घंटे में सक्रिय होती है बाकि समय ऊंचे पेड़ों पर आराम करती है केवल प्रजनन के वक्त नर मादा एक साथ दिखते हैं इनका मुख्य आहार फल फूल और पेड़ की छाल के अलावा कीड़े और पक्षीयों के अंडे है।
फरार आरोपी के घर घर मिला वन्य प्राणी के कई अवशेष वन्य प्राणी अधिनियम में भेजा जेल
मामले पर उदंती सीतानदी एंटी पोचिंग स्क्वायड ने एक मोटरसाइकिल के बेलर गांव के धनसाय,उडीदगांव के अरूण, ग्राम बुड्रा के सुरेन्द्र,रजमन,थानेश्वर को गिरफ्तार कर लिया वहीं ननसखय के घर से गुलेल,बड़ा टार्च तथा दो थैला पाया गया।नहीं तलाशी के दरम्यान आरोपी के मोटर सायकिल में हिरण का सिंग,जंगरी सुअर का दांत शाही पंख,खरगोश फंदा,साल सागौन का चिरान तथा हाथ आया जप्त किया गया है। आरोपियों पर वन्यजीवों के अधिनियम 1972की धाया27,29,31,50,51(1ग)52 के तहत कारवाई की गयी है।
शिकार पर है प्रतिबंध और सजा का है प्रावधान
भारतीय विशाल गिलहरी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 1मे शामिल हैं जिसके शिकार पर कम से कम 3 -7वर्ष का सजा तथा 25 हजार का जुर्माना है एंटी पोचिंग की टीम ने आरोपीयों के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम 1972 की धारा 9,27,29,31,50,51(1ग), 52 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर न्यायलय में पेश किया जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
