भूपेन्द्र सिन्हा
छुरा :- आईएसबीएम विश्वविद्यालय के विधि संकाय एवं आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संविधान दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आनंद महलवार ने किया तथा मुख्य वक्ता के तौर पर कुलसचिव डॉ बीपी भोल, विशिष्ट वक्ता के तौर पर शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ एन कुमार स्वामी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ आनंद महलवार ने कहा कि संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। आज संविधान के बदौलत ही व्यवस्था और न्याय सबके लिए समान अवसर उपलब्ध कराता है। भारतीय संविधान में कई सारे प्रावधान विदेशों से लिया गया है लेकिन अब उनसे आगे बढ़कर नई चुनौतियों से निपटने के लिए कानून बनाये जाने चाहिए। आज कई सारी चुनौतियाँ है जैसे अन्तराष्ट्रीय कानून, डेटा शेयरिंग और डेटा सिक्युरिटी। इन चुनौतियों को लेकर भी जो कानून बनाये गए हैं उनका हमें पालन करना चाहिए।
कुलसचिव डॉ बीपी भोल ने कहा कि देश में लोकतंत्र को स्थापित हुए सात दशक से ज़्यादा समय हो गया है लेकिन कई मामलों में अभी भी हमारी मानसिकता औपनिवेशिक दौर की है। आजादी से पहले राजा का बेटा भी राजा होता था लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में हम देखते हैं कि राजनीति में वही लोग आगे बढ़ रहे हैं जिनके घर या परिवार के लोग पहले से राजनीति में हैं। संविधान सभा में शामिल लोग उदारवादी थे जिन्होंने अपनी ज़मीनें और धन तक देश के निर्धन लोगों को दान कर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान ही हमारे लोकतंत्र का अधिकार है।
शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ एन कुमार स्वामी ने कहा कि भारत अनेक भाषा-भाषी क्षेत्रों, जातियों, धर्मों एवं वर्गों में बंटा हुआ देश है। इस देश में प्रत्येक जाति या क्षेत्र के लोग अपने आप को दूसरों से अलग मानते हुए स्वयं को श्रेष्ठ घोषित करते रहे हैं। ऐसे देश में सबको बराबरी का अधिकार एवं न्याय देना कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा, इसकी सिर्फ़ कल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान को नंदलाल बोस के चित्रों से सजाया गया और उस चित्र में 12 चिन्ह छतीसगढ़ के अलग-अलग जगहों के हैं।
विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ पी विश्वनाथन ने इस अवसर पर छात्रों को संबोधित किया।
इस कार्यक्रम में रूपेश, टेमन, चिन्मया, केशव, कामिनी आदि छात्र-छात्राओं ने पोस्टर और पेंटिंग द्वारा संविधान के कुछ अनुच्छेदों का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ दिवाकर तिवारी ने किया धन्यवाद ज्ञापन विधि संकाय के विभागाध्यक्ष सुश्री छायांगी महामला ने किया। विधि संकाय की सहायक प्राध्यापिका रागिनी सोनी ने संविधान की रूपरेखा छात्रों के समक्ष प्रस्तुत किया। संविधान की प्रस्तावना पढ़कर छात्र रूपेश ने सबको शपथ दिलाया।
