मौत का तांडव…

मौत का तांडव

मौत का तांडव देखें, मचा हुआ है हाहाकार।
दुनिया त्रस्त है, क्या करेगी सरकार ।।1।।
यमराज भी चिंतित हैं, कैसे आए इतने लाश।
कब्र में जगह नहीं है, न ही किसी का है पास ।।2।।
धू -धू कर चिता जल रही, घरवाले है लाचार।
रिश्ते – नाते कह रहे हैं, नहीं रहे मेरा अधिकार।।।3।।
किसी की मांग उजड़ गई, किसी की गोद हुई सूनी।
बुढ़ापे की लाठी नहीं रहे, घर में दुख बढ़े दुनी।।4।।
शहर उजड़ गए ,बस्ती सूनी हो गई ।
रोजमर्रा की चीजें अब दूनी हो गई ।।5।।
किसी का कोई सुनता नहीं, न ही किसी पर है लगाम।
सरकार बैठकर बना रही है ,बातें और कानून तमाम।।6।।
घबराए न धीरज रखें, जीवन जिएं कबीर की तरह ।
बाढ़ की तरह आई महामारी,
जाएगी बयार की तरह।।7।।
संयम नियम से जीना सीखे, हो जाएंगे बेड़ा पार।
दिनेंद्र संतों का कहना मानो, बरज रहे हैं बारंबार।।8।।

लेखक- दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करही भदर
अध्यक्ष मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद ,जिला -बालोद (छत्तीसगढ़)
85648 86665