प्रमोद दुबे
महासमुंद – दीपावली का पर्व अंचल में धूमधाम से बनाया गया। इस बार लक्ष्मी पूजन क्षेत्र में दो दिनों तक किया जाता रहा। नगर में जैन समाज व कुछ व्यापारी बंधुओ ने 31 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजन किया वहीं अधिकांश ग्रामीण अंचलों और घरों में लक्ष्मी पूजन 1नवंबर को मनाया गया. किंतु गोवर्धन पूजा, मातर, भाई दूज के लिए किसी तरह का संशय नहीं था और गोवर्धन पूजा 2 नवंबर और मातर, भाई दूज 3 नवंबर को मनाया जा रहा है। संध्या बेला में लक्ष्मी पूजन कर लोगों ने पटाखे फोड़े और एक दूसरे को बधाई दी। इसी तरह गोवर्धन पूजा के अवसर पर ग्रामीण अंचलों में उत्सव का माहौल रहा। गौशाला में गौ माता और गोवंश के सभी मवेशियों को खिचड़ी खिला कर पूजन किया गया।

इसी तरह घरों में भी किसान और मवेशी पालक अपने घरों में गोवर्धन का प्रतिबिंब बनाकर पूजन किया और यादव समाज के लोग बाजे गाजे के साथ पहुंचकर दोहा पढ़ते हुए ठाकुर जोहर कर मवेशियों को सोहां बांधकर पूजन किया। इसी तरह गोंड़ कब समाज का प्रमुख पर्व गौरा गौरी की आराधना भी धूमधाम से की गई। इस बार यह उत्सव नगर में तीन दिनों का रहा, 31 अक्टूबर को तालाब से मिट्टी लाकर गौरा गौरी बनाया गया। रात्रि में कलसा परधाने के साथ ही धूमधाम से रीति रिवाज के साथ पूजन किया जाता रहा। दूसरे दिन भी लक्ष्मी पूजन था इसलिए गोवर्धन पूजा 2 नवंबर की सुबह से दोपहर तक गौरा गौरी विसर्जन का सिलसिला चला रहा. विसर्जन के लिए निकली गौरा गौरी के सामने लोग सांटा लेते रहे और बच्चों को प्रज्वलित ज्योत से शुभ शगुन के रूप में आंकतज भी रहे। ऐसी मान्यता है कि इससे बच्चों और घर में कुदृष्टि नहीं आती और गौरा गौरी का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
