विजयादशमी के पावन पर्व पर भव्य शोभा यात्रा।

प्रतापपुर :- त्रेता युग में जब श्री रामचंद्र जी द्वारा रावण का वध किया गया उस तिथि को विजयादशमी के रूप में और असत्य पर सत्य की विजय के लिए पूरे भारत ही नहीं विश्व के सभी जगह जहां भी हिंदू सनातनी रहते हैं बड़े हर्षो उल्लास के साथ मानते हैं इसे दशहरा भी बोला जाता है क्योंकि रावण के 10 शीश को श्री राम चंद्र जी ने हर लिया था।

इसी के तहत 12 अक्टूबर 2024 दिन शनिवार को श्री रामचंद्र जी की शोभायात्रा दोपहर 3:00 बजे मां समलेश्वरी मंदिरसे प्रारंभ हो रैली के रूप में प्रतापपुर भ्रमण करते हुए जिसमें एक सजाई गई रथ में श्री रामचंद्र जी, माता जानकी, लक्ष्मण भैया, एवं हनुमान जी के वेशभूषा में छोटे-छोटे बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुति दी तथा ज्यादातर युवा वर्ग सफेद, भगवा, तथा पीले कलर के कुर्ते एवं सफेद पैजामे के ड्रेस कोड के अलावा युवा लड़कियां सफेद कुर्ती पजामा हाथों में भगवा झंडा लहराते हुए डीजे के धुन पर ढोल नगाड़ों के साथ जय श्री राम के नारे एवं जय श्री राम के गीत के धुन पर झूमते हुए पूरा नगर भ्रमण किये आज के दिन अस्त्र शस्त्रों की पूजा भी की जाती है जिनके पास अस्त्र-शस्त्र थे जैसे तलवार, बंदूक, भाला इत्यादि भी कुछ लोगों के पास देखने को मिली।

शोभा यात्रा मिनी स्टेडियम प्रतापपुर में समाप्त हुई जहां पूर्व वर्षों की भांति रावण मेघनाथ एवं कुंभकरण के पुतले दहन के लिए खड़े किए गए थे। जोकि अहंकार के प्रतिबिंब माने जाते हैं और इनका दहन रात्रि 10:00 बजे पूरी जनता के समक्ष राम और लक्ष्मण बने प्रतीकात्मक स्वरूप द्वारा किया गया। दहन के पूर्व आतीष बाजी का भी जबरदस्त प्रदर्शन किया गया पूरा स्टेडियम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। यह प्रथा हमेशा हमें याद दिलाती है।

की अहंकार एवं दुराचार मनुष्य के पतन का कारण बनता है चाहे वह कितना भी ज्ञानी या धनवान व्यक्ति हो उदाहरण स्वरूप रावण, कुंभकरण, और मेघनाथ अतः हमें हमेशा सदाचार, सहनशील एवं नम्रता के आचरण का पालन करना चाहिए।