धर्मनगरी मे चैतन्य दैवीयो की झांकी बनी आकर्षण का केन्द्र।

ब्रह्माकुमारी बहनो ने कुम्भ्कर्णी निद्रा से मानव समाज को जगाने का किया प्रयास।

राजयोगीनी पुष्पा दीदी ने समाज प्रमुखो की उपस्थिती मे किया चैतन्य दैवीयो की झांकी का उद्घाटन।

परमात्मा दे रहे आत्म शक्तियो को जागृत करने की शिक्षा —- बी के शकुन्तला।

चम्पारन (नवापारा राजिम):- नवरात्रि के पावन अबसर पर धर्म नहरी चम्पारन मे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोग प्रशिक्षण केंद्र की शिव शक्ती भवन में चैतन्य देवियों की भव्य झांकी सजाई गई है। विशेष आकर्षण का केंद्र बनी इस झांकी में पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को नवरात्रि पर्व का आध्यात्मिक रहस्य सरल-सहज तरीके से समझाते हुए उन्हें अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत कर नर से नारायण समान बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। चम्पारन नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचल के भाई-बहनें यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में चैतन्य देवियों के दर्शन करने और ब्रह्माकुमारी शकुन्तला दीदी जी से वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए पहुँच रहे हैं।गत मंगलवार को चैतन्य झांकी के शुभारंभ अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय मुख्य संचालिका राजिम से पहुंची ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदीं ने नगर प्रमुख एवं समाज के वरिष्ठ जनो की उपस्थित मे जनसमुदाय को देवियों के आध्यात्मिक रहस्य से अवगत कराते हुए बताया कि मां दुर्गा से तात्पर्य दुर्गुणों को दूर करने वाली शक्ति से है। देवियों के व्रत के साथ हमें मन से दुर्गुणों को त्यागने का संकल्प लेना चाहिए। मां लक्ष्मी वह हैं, जिसमें महान लक्ष्य होते हैं, इसलिए यह कहा जाता है कि “नर ऐसी करनी करे जो नारायण बन जाए, और नारी ऐसी करनी करे जो लक्ष्मी के समान पूजी जाए।” हमें अपने जीवन में यह लक्ष्य रखना चाहिए कि संसार रूपी कीचड़ में रहते हुए भी कमल की तरह बुराइयों और गलत संस्कारों से मुक्त रहें। दीदी जी ने बताया कि, मां सरस्वती को हंस पर विराजमान, हाथ में वीणा लिए और धवल वस्त्रों में दिखाया गया है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि कलियुग के अंत में जो आत्मा सादगी और पवित्रता का धवल वस्त्र धारण करती है और जिसके मन एवं मुख से सदा ज्ञान रूपी वीणा झंकृत होती रहती है, वही हंस के समान नीर-क्षीर विवेक कर दुर्गुणों से दूर रह पाती है।परमात्मा दे रहे आत्मा की शक्तियों को जागृत करने की शिक्षाब्रह्माकुमारी शकुन्तला दीदी ने नवरात्रि का अर्थ समझाते हए कहा की रात्रि अर्थात् अज्ञान, अंधकार, बुराइयों और आसुरीयता का समय। नवरात्रि का उद्देश्य है अपने भीतर घर कर चुकी बुराइयों को नव संकल्पों के साथ दूर कर जीवन में दिव्यता और पवित्रता का आह्वान करना। जागरण का अर्थ है अपनी शक्तियों का जागरण करना। देवियों को आदिशक्ति और शिव शक्ति भी कहा जाता है। कालांतर में इन शक्तियों ने शिव से योग बल द्वारा शक्ति प्राप्त की थी, इसलिए इन्हें शिव शक्ति कहा जाता है। जब संसार में अज्ञानता की रात्रि छा जाती है, तब परमात्मा आत्मा की शक्तियों को जागृत कर अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। वर्तमान समय में यही परिवर्तन का काल चल रहा है। परमात्मा धरती पर आकर आत्माओं की शक्तियों को पुनः जागृत करने की शिक्षा दे रहे हैं।

माताओं-बहनों का सम्मान करने पर मिलेगा देवी माँ का आशीर्वाद – बहनजी ने आगे कहा कि हमारे समाज में नारी को देवी का रूप माना जाता है, लेकिन आज समाज एक ओर नवरात्रि के रूप में देवियों की पूजा करता है और दूसरी ओर देवियों के वास्तविक स्वरूप– नारियों का अपमान करता है। भारत की परंपराओं में नारी का स्थान सर्वोच्च है। नवरात्रि का वास्तविक अर्थ है कि केवल नौ दिनों तक नहीं, बल्कि सदा नारी शक्ति का सम्मान करना चाहिए। हम जितना सम्मान नौ देवियों को देते हैं, उतना ही हमें अपनी माताओं-बहनों का भी सम्मान करना चाहिए। तभी देवी मां प्रसन्न होकर हमें अपने आशीर्वाद से मालामाल करेंगी। झांकी दर्शन मे ब्रह्माकुमारी बहनो द्वारा कुम्भ्कर्णी निंद्रा मे सोये हुए मानव समाज को जगाने का अनोखा प्रयास किया जा रहा है।वही झांकी के साथ साथ आध्यात्मिक प्रवचन के इस कार्यक्रम में चम्पारन पंचायत प्रमुख विजय यदु,नन्हूराम साहू,परस राम, आदि ने भानू प्रताप साहू,राधे लाल साहू,सुधूराम ,राधेश्याम सहित संस्थान के इस प्रयासों का मुक्त कंठ से प्रशंसा की कार्यक्रम मे अनेक गणमान्य नागरिक ग्रामीण समाज उपस्थित रहे।