प्रेरक प्रसंग..
आचार्य विनोबा भावे से हम सभी सुपरचित हैं। उन्हीं के बाल्यकाल की एक घटना है जो हमें अस्थिर चित्तता के विपरीत एकाग्रता के महत्व का पाठ पढ़ाती है ।जब विनोबा भावे 9 वर्ष के रहे ,तब वे अध्ययन हेतु एक पाठशाला में जाते थे। एक दिन उनके शिक्षक ने सभी छात्रों से कुछ शब्द लिखवाया…
