बेटे की चाह में भ्रूण की करवाते हो जांच बेटी पल रही जानकर होते क्यूँ निराश।
कविता “”””””””””””””””” विषय-भ्रूण हत्या पाप —————————————— बेटे की चाह में भ्रूण की करवाते हो जांच बेटी पल रही जानकर होते क्यूँ निराश गर्भपात करवाकर करते हो तुम पाप नवरात्र में देवी के रूप में करते पूजा पाठ। माँ की कोख से जन्मे तुम भूलते ये बात बेटियां होती हैं माता पिता का अभिमान मातृ-शक्तियों से…
