कोरोना” प्रकृति से छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है- कमलेश चंद्राकर
*”कोरोना” प्रकृति से छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है- कमलेश चंद्राकर* मुकेश कश्यप @कुरुद:- “चोला माटी के हे राम” प्रकृति का दोहन करते हाईटेक तरंगे, रासायनिक भोजन, जिंदगी को आसान बनाते बड़े-बड़े मशीन उपकरण, सरल और आधुनिक जरुरतें अब हमारे जिंदगी में बहुत ही ज्यादा उपयोगी बन गयी है। फिर भी अपनी दिनचर्या अव्यवस्थित कर हम…
