प्रमोद दुबे
महासमुंद। भाजपा सरकार के गरीब विरोधी नीतियों के चलते राज्य के पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। केंद्रीय मंत्री का राजनीति से प्रेरित निराधार आरोप है कि पूर्व के कांग्रेस सरकार की नीतियों के चलते प्रदेश के लोगो को इस योजना का लाभ नहीं मिला। उक्त बातें नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। नपाध्यक्ष श्रीमती महिलांग ने कहा कि छग में भूपेश सरकार के समय केंद्र की सरकार ने राज्य के सात लाख आवासों को निरस्त किया था। निरस्त करने का मुख्य कारण राज्यांश देरी से जमा होने बताया गया जबकि राज्य ने 800 करोड़ रुपये राज्यांश के रुप में जमा किया था व उसे केंद्र की सरकार से विभिन्न मदों से 50 हजार करोड़ रुपये लेनदारी थी।यह आवास आबंटन विभिन्न राज्यो में भी निरस्त किए गए थे। तत्कालीन भूपेश सरकार ने नए सिरे से अपने व्यव से नए सिरे से आवासों की स्वीकृति प्रदान की थी। वर्तमान भाजपा सरकार ने अपने 7 माह के कार्यकाल में एक भी नए आवासों की स्वीकृति नहीं दी है। विधानसभा के प्रश्नों के जवाब में उपमुख्यमंत्री श्री साव ने सदन को बताया है कि 6 महीनों में केंद्र ने राज्य को प्रधानमंत्री आवास के लिए कोई भी स्वीकृक्ति प्रदान नहीं की है। श्रीमती महिलांग ने माँग की केंद्र सरकार के 18 लाख स् आवासों की स्वीकृति के दावों में राज्य के आवास हितग्राहियों में कितने हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास प्रदान हुआ है, व उनके नाम सूची सार्वजनिक किए जाए। श्रीमती महिलांग ने आगे कहा कि राज्य व केंद्र की सरकार के प्रधानमंत्री आवास वि प्रदान करने के दावे केवल सरकारी विज्ञापनों व ता होर्डिंग्स तक ही सीमित है। जबकि धरातल की क सच्चाई इन दावों के ठीक विपरीत है। राज्य में भाजपा सरकार के गठन बाद से प्रदेशवासियो को एक भी आवास वर्तमान तक नहीं मिल पाया है। जबकि पूर्व की कांग्रेस की सरकार ने आवासहीनो के खातों में पहली किश्त भी डाली थी जबकि वर्तमान सरकार के सात महीनों के सत्तासीन होने के पश्चात भी 1 रुपए आवासहीनों के खाते में नहीं आए है।
