लाल ईंट से हो रहा वनमण्डल कार्यालय में निर्माण कार्य।

शासकीय कार्यालयों में ही नही हो रहा नियमों का पालन।

विभाग की अनदेखी से बढ़ रहा है लाल ईंटों का काला व्यापार।

सुरेन्द्र मिनोचा

मनेंद्रगढ़/एमसीबी – शासन द्वारा किसी भी तरह के निर्माण कार्यों में लाल ईंट के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बाद लाल ईंट की जगह फ्लाईऐश ईटों के प्रयोग का निर्देश जारी किया गया है, लेकिन जिले में कहीं भी इसका पालन होते नहीं दिख रहा है। पूर्व में हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद निजी भवनों के अलावा शासकीय भवनों में भी लाल ईंट का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल कार्यालय में चल रहे निर्माण कार्य मे भी बेधड़क लाल ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। विभाग के जिम्मेदार अफसरों की आंख के सामने ठेकेदार द्वारा प्रतिबंधित लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इस पर रोक लगाना किसी ने मुनासिब नही समझा। संबंधित विभाग के द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से ठेकेदारों ने भी बिना डर भय के लाल ईंट का निर्माण करना शुरू कर दिया है।वन मंडल में चल रहे इस निर्माण कार्य से ये समझा जा सकता है की जिम्मेदार अधिकारी ही प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं।

“धड़ल्ले से हो रहा है लाल ईंट का निर्माण”

शासकीय भवनों में भी लाल ईंटों के प्रयोग पर शासन के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से ठेकेदारों ने भी पुनः लाल ईंट का निर्माण करना शुरू कर दिया है। गांव-गांव में लाल ईंटों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। ईट पकाने के लिए कहीं भूसे का प्रयोग हो रहा है,तो कहीं अवैध कोयला,तो कहीं हरे-भरे वृक्षों की बलि दी जा रही है।पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए सुप्रीमकोर्ट के आदेश अनुसार शासन के सभी शासकीय निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश ईंट का उपयोग किया जाने का सख्त निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी सरकारी निर्माण कार्यों में आज भी बेधड़क लाल ईंटों का उपयोग किया जा रहा है।

  “इनका कहना है”

इस संबंध में वनमण्डल मनेन्द्रगढ़ के वनमंडलाधिकारी मनीष कश्यप का कहना है कि फ्लाई ऐश ईंट की कमी और महंगा मिलने के कारण लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है। भविष्य में होने वाले निर्माण कार्यों के लिये फ्लाई ऐश ईंट की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।