गजामूंग प्रसाद का किया गया वितरण।
प्रमोद दुबे
महासमुंद – नगर व अंचल में रथयात्रा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर महाप्रभु जगनाथ, बहन सुभ्रदा व बलराम ने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण किया और लोगों को दर्शन दिए। साल में एक बार यह आयोजन होता है जिसमें भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलते है और बाहुड़ा यात्रा के रूप में देवशयनी एकादशी के दिन या पूर्व वापस अपने गर्भगृह में पहुंचते है।श्रीराम जानकी मंदिर से मध्यान्ह पूजन के बाद तीनों प्रतिमाओं को जयघोष, शंखनाद के बीच रथ में आरुढ़ किया गया। इस दौरान ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य, आमजन व जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नगर भ्रमण के दौरान महाप्रभु के दर्शन करने जनसैलाब उमड़ पड़ा था। नगरवासियों के अलावा आसपास से भी ग्रामीणजन काफी संख्या में पहुंचे थे। गांधी चौक, नैहरू चौक, स्वामी चौक, अंबेडकर चौक, महामाया मंदिर होते हुए महाप्रभु का रथ पुरानी बस्ती स्थित अमन-गौतम चंद्राकर के निवास में पहुंचकर रात्रि विश्राम करेगी इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर महाप्रभु का रथ ले जाया जाएगा जहां विधि विधान से पूजन, भजन आयोजन के बाद बाहुड़ा यात्रा के रूप में पहुंचेगी। रथयात्रा में महाप्रभु के दर्शन के साथ ही मैत्री के प्रतीक गजामूंग का प्रसाद लेने लोग रूमाल, गमछा आदि रथ पर फेंककर लेते रहे। इसी तरह नगरवासियों ने महाप्रभु के दर्शन के साथ श्रीफल व यथायोग्य भेंट अर्पण करते रहे। गजामूंग प्रसाद वितरण के लिए करीब 7 क्विटल चना, मूंग व गुड़ की व्यवस्था की गई थी। जगन्नाथ पुरी में भगवान के महाप्रसाद को एक दूसरे को प्रदान कर मित्र बनाया जाता है उसी तरह का भाव गजामूंग प्रसाद में भी है और लोग एक दूसरे को प्रदान कर मित्र की संज्ञा देते है। पुराने लोग आज भी गजामूंग बदने की याद दिलाने से नही चुकते। रथयात्रा के आगे-आगे रामसत्ता का गुनगान करते भजन मंडली चली रही थी। वही उड़िया गीतों पर डीजे के धून में लोग नाचते गाते रथ के आगे चल रहे थे।

नगरपालिका अध्यक्ष रात्रि त्रिभुवन महिलांग ने बग्गा स्टोर्स के पास रथयात्रा व श्रद्धालुओं का सुगंधित जल की फुहार से अगुवानी की। वैसे श्रीराम जानकी मंदिर में सुबह से ही दर्शन करने लोग उमड़ पड़े थे मंदिर स्थित सभी देवताओं में भीड़ लगी रही। सुबह मंगला आरती के बाद दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर तक चलता रहा। रथयात्रा के नगर भ्रमण के दौरान दो-ढाई घंटे तक यातायात डायवर्ड करने के कारण गली मोहल्लों में यातायात का दबाव बढ़ गया था और शार्टकट के चक्कर में लोग ट्रैफिक में फंसते भी चले गए थे।
