प्रमोद दुबे
महासमुंद – भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग अलग रथो पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जनकपुर जाते हैं। भगवान जगन्नाथ जी रथ पर सवार होते हैं। भगवान जगन्नाथ जिस रथ पर सवार होते हैं।उसे नंदी घोष बलभद्र के रथ को तालध्वज और सुभद्रा देवी के रथ को दर्प दलन कहा जाता है। गुंडिचा मंदिर में 7 दिनों के वास के बाद तीनों मूर्तियां पुनः रथ में सवार होकर मंदिर लौटी है । वदंति अनुसार राजा इंद्र धुन और उनकी पत्नी गुंडिचा देवी ने सर्वप्रथम गुंडिचा मंदिर में ही भगवान जगन्नाथ की स्थापना की थी बाद में बड़ी धूमधाम के साथ उन तीनों मूर्तियां को तीन रथो पर बिठाकर घूमाने के बाद पुनः मंदिर ले आए जहां उनकी स्थापना की थी यही से ही प्रतिवर्ष रथ यात्रा निकालने की परंपरा प्रारंभ हुई। पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर व रथ यात्रा का महत्व है । इस तरह पिथौरा, महासमुंद जगन्नाथ मंदिर व रथ यात्रा का भी महत्व है। कौड़िया स्टेट जो सिरपुर से लेकर सरायपाली तक अपने नाम से जाना जाता है। यहां की रानी विष्णु प्रिया ने लगभग 150 वर्ष पूर्व जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। सीधे तथा सरल ढंग से बनाए गए जगन्नाथ मंदिर में एक गर्भगृह ( पूजा स्थल) है।
