विश्व पर्यावरण दिवस पर विचार संगोष्ठी एवं पौधा रोपण का आयोजन।

वृक्ष हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के धरोहर हैं:नारायण।

सुरेन्द्र मिनोचा

मनेन्द्रगढ/एमसीबी – वट अमावस्या एवं वट सावित्री के व्रत एवं पर्व पर वट वृक्षों को देवतुल्य मानकर उसकी पूजा की जाती है, हमें वृक्षों के महत्व एवं उपयोगिता को समझना है और इन्हें बचाना है वृक्षों से ही हमारा पर्यावरण शुद्ध होता है और जीवन संभव हो पाता है -उक्ताशय के विचार पतंजलि योग समिति के द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित विचार संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता नारायण प्रसाद तिवारी व्यक्त कर रहे थे। श्री तिवारी ने कहा कि बरगद पीपल, तुलसी हमारे आध्यात्मिक सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं का हिस्सा रहे है। इन देव वृक्षों के महत्व और वैज्ञानिक अवधारणाओं की चर्चा करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि- गांव में लोग बरगद या पीपल का पेड़ नहीं काटते, यह हमारे चारों ओर के विराट प्राकृतिक परिवेश को शुद्ध करता है। विचार श्रृंखला को आगे बढ़ते हुए नारायण प्रसाद तिवारी ने बरगद, पीपल एवं तुलसी वृक्ष की महत्ता सनातन हिंदू दर्शन के कई उदाहरणो के साथ प्रस्तुत की ।कार्यक्रम संयोजक एवं पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ जिला प्रभारी सतीश उपाध्याय ने यूकेलिप्टस एवं गुलमोहर के पेड़ो की जगह घने फलदार पौधों के संरक्षण की अपील की । इस परिचर्चा में योग समिति के नियमित योग साधक जसवीर सिंह रैना, सुखविंदर सिंह, कैलाश दुबे, डा संदीप चंदेल,बलवीर कौर , राकेश अग्रवाल, धर्मराज ,विवेक कुमार तिवारी,पिंकी सलूजा आदि उपस्थित रहे। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस विचार संगोष्ठी में चर्चा करते हुए प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। आमंत्रित वक्ता का स्वागत डॉ संदीप चंदेल ने किया।कार्यक्रम के प्रथम चरण में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ संदीप चंदेल ,आर डी दीवान, रामसेवक विश्वकर्मा के द्वारा फलदार पौधे विकसित करने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर के विकसित गार्डन में श्रमदान भी किया। पर्यावरण प्रेमी आर डी दीवान ने कहा कि-विश्व योग दिवस के अवसर पर भी पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए विभिन्न प्रजातियों के फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक ने किया।