सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी :- नगर पालिका परिषद् मनेन्द्रगढ़, वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद,श्यामसुन्दर पोद्वार ने मजदूर दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सही है जिस इमारत पर- जिस इमारत के कंगूरे को देखकर हम “नाज़ करते है. उसी की नींव पर मजदूरो का पसीना बहा होता है।
आज मजदूर दिवस है – लोग शुभकामनाऐं- बधाई देकर
मजदूरों के मसीहा बनने का प्रयास कर रहे हैं, चुनावों में रैलियों मे- धनबल से मजदूरों को लाकर बडे आकाओं की सभाओं मे भीड़ दिखा – मजदूरों को भरी तपती गर्मी मे भूखे प्यासे रख उनकी मानवता को शोषण करने वाली पार्टियां- सरकारें मजदूरो की ” सुध लेने को नही सोचती| वे लोग जो मजदूरो की भीड़ से- सरकार बनाने -विधायक बनने-सांसद बनने का सपना देखने हैं वे उन मजदूरो की पीड़ा को समझने का प्रयास कभी नहीं करते।यही गजदूर पसीना बहाकर – हल चलाकर अनाज उगाता है, तपती धूप में ईंट बनाता है-आपका हमारा मकान बनाता है। आज उन्ही का आत्म सम्मान दिवस है – इस तरह के तबके में इस दिवस को लेकर कोई उत्साह नही रहा है- बढ़ती महगाई पारिवारिक जिम्मेदारियो ने भी मजदूरों को उत्साह से दूर कर दिया है।मजदूर दिवस इनके लिये सिर्फ रस्म बनकर रह गया है।आलम यह है कि दो जून की रोटी एक अदद छत और बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने संजोये – पराये प्रदेश मे आकर हाड़तोड़ मेहनत करने के बाबजूद तिल तिल’ सिसकती जिन्दगी जी रहे हैं ये लोग |गाँवो मे हैण्डपम्पों में पानी नही – शौचालयो मे लाखो खर्च किये गये-पानी नही होने के कारण – शौचालय संग्रहालय बन कर रह गये, ओले – बारिश से फसलें बरबाद – किसान- बरबाद खाने को लाले पडते हैं-फिर भी मजदूर-जिन्दा है -जिन्दा रहकर अपने परिवार को पालता है।देश के विकास में अग्रणी भूमिका अपने कंधो पर लादे ये मजदूर-विवश है,वो मजदूर है।”जिनके कन्धो पर बोझ बढ़ा वो भारत माँ का बेटा कौन।
“जिसने पसीने से भूमि सीचा, वो भारत माँ का बेटा कौन”
वह किसी का गुलाम नही: अपने दम पर जीता है,सफलता का एक कण ही सही लेकिन है अनमोल, जो मजदूर वो कहलाता है। किसी को क्या बताऐं कि कितने मजबूर है हम,बस इतना समझ लीजिए कि “मजदूर” है हम।
