पिछला रिपोर्ट कार्ड एवं 5 साल के विजन से  बीजेपी की तीसरी बार होगी पुनरावृति – सतीश उपाध्याय।

सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी :- लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे परवान चढ रहा है, भाजपा की चुनावी रणनीति स्पष्ट होती जा रही है।इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने यह मंत्र दिया है । चुनावी मंत्र बहुत खूबसूरत है, एवं कारगर भी हो सकता है ।इस मंत्र में दूरदर्शिता का स्पष्ट प्रभाव दिख रहा है।उन्होंने कहा है-भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता वहां तक पहुंचे जहां लोगों का जीवन आसान नहीं है ,नए वोटरों से संपर्क करें। ” एक हाथ में 10 साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर जाएं और दूसरे हाथ में अगले 5 साल का विजन।” भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में भी तीसरी बार सत्ता वापसी को लेकर प्रधानमंत्री का आत्म बल गजब का है ।इस आत्म बल के आगे कांग्रेस बिखरती हुई दिख रही है।
2024 के लोकसभा का चुनाव का रण अब लगभग सज चुका है। चुनाव के कुछ दिन बचे हैं ।भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों ने भी कमर कस ली है इसी के तहत राहुल गांधी “भारत न्याय यात्रा “में निकल चुके हैं।अब यह अलग बात है कि राहुल गांधी की यह न्याय यात्रा पार्टी का जन आधार बढ़ाती हैं, या फिर , स्थिति जस की तस ही रहती है ।जीत के लिए राहुल गांधी भारत न्याय यात्रा के तहत बेशक सघन जनसंपर्क कर रहे हैं।भाजपा ने 370 एवं उसके गठबंधन का 400 का लक्ष्य रखा है। फॉर्मूला- 370 यदि कारगर होता है तो भाजपा की राह आगे काफी आसान हो सकती है एवं भाजपा एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर सकती है, जो लोकतंत्र में भी कई-कई वर्षों तक सटीक उदाहरण बन सकता है।
वर्तमान हालातो को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक और मजे हुए अनुभवी राजनीतिक पंडित कह रहे हैं कि – नरेंद्र मोदी का पुनः प्रधानमंत्री बनना तय है,और इस जीत के बाद यदि मोदी पुनः प्रधानमंत्री बनते हैं तो यह बात तो तय है कि कई राजनीतिक, प्रशासनिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जबरदस्त परिवर्तन होगा। भ्रष्टाचार में लिप्त कई रसूखदार लोग जेल की सलाखों के पीछे होंगे। देश के बड़े एवं चौंकाने वाले भ्रष्टाचार इन दिनों सामने है।कुछ राजनीतिक बिरादरी सत्ता में काबिज होते ही लूट शुरू कर देती है और अपने कई पुश्तों के लिए अकूत संपत्ति अर्जित कर लेती है। वहीं एक शख्स ऐसा भी है जो “न खाऊंगा,न खाने दूंगा”के सिद्धांत पर चलकर ईमानदारी से काम कर रहा है।
मोदी जी की कूटनीति धीरे-धीरे काम करती है । पहले प्रारंभिक दौर में तो लगता है इससे चुनाव का दूर-दूर तक कोई नाता रिश्ता नहीं है परंतु फिर बाद में समझ में आता है कि यह चुनाव की रणनीति का ही एक हिस्सा है ।यदि पिछले तीन-चार माह का आकलन किया जाए तो मोदी जी के निर्देशानुसार चुनाव जीतने के लिए जिस तरह के राजनीतिक प्रबंधन जरूरी होते हैं वह सब सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं ।जितनी कमजोर कड़ियां थी उनकी मरम्मत की जा रही है।
भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है ।2019 के चुनाव में भाजपा की लगभग ऐसी 50 सीटें थी ,जहां जीत का अंतर दो प्रतिशत से भी कम था ,इन सीटों पर विपक्षी गठबंधन अगर एक उम्मीदवार उतार देता है तो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
अब कुशल प्रबंधन के रूप में जाने वाले नरेंद्र मोदी ने 370 का लक्ष्य दिया है। यह लक्ष्य वर्तमान राजनीति की फिज़ा को देखते हुए सहज एवं सरल ही लग रहा है। 370 का लक्ष्य पार करना भाजपा के लिए कोई बड़ी बात नहीं लग रही है। इस समय नरेंद्र मोदी का ग्राफ काफी ऊंचा है।उनके काम की समझ काफी अच्छी है। इसलिए एक अनुशासित एवं राष्ट्रीय मूल्यों में रची बसी इस पार्टी का देश में शीर्ष स्थान है।
यह उनके राजनीतिक कौशल का ही परिणाम है कि चुनाव से पहले भाजपा जैसी राजनीतिक पार्टियां काफी विनम्र और व्यवहारिक दिखाई देती है।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो बीजेपी की प्रबंध समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा छत्तीसगढ़ भाजपा को जो निर्देश दिया गया है, उसको पूरे करने का संकल्प दोहराया है।इस कार्य योजना के अनुसार काम भी हो रहा है। कोरबा लोकसभा प्रभारी धरम लाल कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 11 की 11 लोकसभा सीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को उपहार में देना है। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आएगा स्थिति और स्पष्ट होती जाएगी फिलहाल जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी के नेता बीजेपी में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं, उस आधार पर कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी एक सशक्त रणनीति एवं मजबूत संकल्प के साथ जीत के प्रति आशान्वित दिखाई दे रही है।