प्रमोद दुबे
महासमुंद :- पूर्व संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर ने कहा कि जब भी इतिहास लिखा जाएगा, तब मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल को किसानों के खिलाफ बर्बरता, दमन और दंशकाल के रूप में जाना जाएगा। आज भाजपा की केंद्र सरकार तथा हरियाणा.राजस्थान. उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों ने देश की राजधानी दिल्ली को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर रखा है, जैसे कि किसी दुश्मन ने दिल्ली की सत्ता पर हमला बोल दिया हो। दिल्ली के चारों ओर खासतौर पर हरियाणा और दिल्ली बॉर्डर का मंजर, सोनिपत में कुंडली और बहादुरगढ़ में टीकरी बॉर्डर पर सीमेंट के बैरिकेड, बड़े. बड़े बोल्डर रोड. रोलर व कंटेनर्स लगाकर उन्हें सील कर दिया गया है। यही हाल यूपी और राजस्थान बॉर्डर का भी है। चंद्राकर ने कहा कि देश के अन्नदाताओं को अपने अधिकारों के लिए आज तरह तरह के जुल्म सहने पड़ रहे हैं। अपने हक के लिए किसान दिल्ली चलो नारे के साथ पूरे अनुशासन के साथ जा रहे हैं, रास्ते में किसानों द्वारा ना कहीं ट्रैफिक जाम किया जा रहाए ना ही चक्काजाम। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार किसानों से बात करने के बजाए उन पर बल प्रयोग कर उन्हें दिल्ली बार्डर पर रोक रही है। दो वर्ष पहले मोदी सरकार ने तीन काले कानूनों को रद्द कर एमएसपी पर गारंटी देने का वादा किया था। इसके बाद किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया था। लेकिन, एमएसपी को लेकर अपने वादे पूरे नहीं किए। 2021 में कृषि कानूनों को लेकर किसानों को बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी। किसान करीब एक साल तक लगातार धरना प्रदर्शन करते रहे। इस आंदोलन के दौरान 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार को किसानों की मौत का कोई अफसोस नहीं हुआ।
2021 के आंदोलन की तरह ही इस बार भी अपनी कई मांगों के लिए किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन किसानों की बात सुनने के बजाए मोदी सरकार उन पर आशु गैस के गोले छोड़ रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा किसानों पर अत्याचार उनके किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
