स्थानीय लोगों ने शीघ्र एनीकट को भरने की किया मांग

राजिम :- मानसून विदा होने के बाद पूरा अक्टूबर बीत गया और नवंबर माह शुरू हो गया है लेकिन अभी तक धमतरी जिले के आखिरी छोर तथा त्रिवेणी संगम के दक्षिण दिशा में बने नवागांव एनीकट में जल संसाधन विभाग पानी रोक नहीं पाए हैं नतीजा पूरा एनीकट खाली है। शहर के किसान भोले साहू, गजानन साहू, श्याम साहू, भवानी शंकर साहू, भारत निषाद, वाल्मीकि धीवर, कृष्णा साहू, टीकम पाल, मोती सोनकर, गोपाल पटेल, ललित पटेल, रामकुमार साहू ने कहा कि नवागांव एनीकट राजिम शहर के लिए वरदान है। यहां पानी भरा रहने से बस्ती का पानी का लेवल बना रहता है। इस बार अभी तक पानी नहीं रोकने के कारण भूजल स्तर में अभी से फर्क दिखाई दे रहा है। निरंतर लेवल गिर रहा है। शीत ऋतु में यह स्थिति है तो ग्रीष्म ऋतु में क्या हाल होगा कह पाना मुश्किल है। बता देना जरूरी है कि सन् 2015 में प्रदेश के तत्कालीन सरकार के द्वारा करोड़ों रुपया की राशि खर्च कर नवागांव एनीकट का निर्माण किया गया था। ताकि तीनों जिले के अनेक गांव जिनमें धमतरी जिला के नवागांव, बुड़ेनी,भेंडरी, चंद्रसुर, चंदना, परेवाडीह, मोंहरेंगा आदि को इसका फायदा मिल सकें। गरियाबंद जिले के राजिम शहर, चौबेबांधा, सिंधौरी, बरोंड़ा, पथर्रा, नवाडीह, पीपरछेड़ी इत्यादि तथा रायपुर जिला के एक बड़ी आबादी वाले नवापारा शहर इससे लाभान्वित होते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो कम से कम डेढ़ से दो लाख लोग एनीकट के पानी के ऊपर आश्रित है। इसमें पानी भरा रहता है तो लगभग इन सभी गांव एवं शहरों का जलस्तर बना रहता है। इस बार तो पानी ही नहीं है। एनीकट के गेट खुले हुए हैं। धार बिल्कुल कम हो गया है। अब तो नहाने में भी तकलीफ हो रही है। नहाने के लिए भी नदी में पानी नहीं बचा है। अब एनीकट को भरने के लिए पानी छोड़ने की आवश्यकता है।इन्होंने कहा कि कैसे भी हो पानी को सुरक्षित और संरक्षित किया जाए। जिससे सब लोगों का भला हो। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में चुनाव आचार संहिता लगी हुई है ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है परंतु यहां तो ढाक के तीन पात जैसी कहावत चरितार्थ हो रही है। आसपास के रहवासी आज रोकेंगे, कल रोकेंगे यही उम्मीद में जल संसाधन विभाग की ओर मुंह ताक रही है। ऐसे में विभागीय उदासीनता समझ से परे हैं। बताया जाता है कि गेट को बंद करने का काम जल संसाधन विभाग धमतरी के मार्फत है। यही के अधिकारी कर्मचारी जल द्वारा को बंद व खुला करते हैं। जबकि पानी सिकासेर जलाशय, कुकदा पिकअप वियर या फिर कोपरा एनीकट से आता है। यहां से ही पानी छोड़ेगा तब कहीं नवागांव एनीकट भर पाएगा। यह भी जानना जरूरी है कि इसी नवागांव एनीकट से मांघी पुन्नी मेला के लिए धर्म नगरी राजिम के संगम में पानी सप्लाई होता है। यदि इसमें पानी न रहे तो बाहर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संगम में पानी नहीं मिल पाएगा। दिनों दिन पानी के धार कम हो गये हैं। आने वाले समय में विकराल जल समस्या से पूरा क्षेत्र जूझेगा, जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। यह बड़ी प्रश्न खड़ी होती जा रही है। लोग तत्काल नवागांव एनीकट के गेट को बंद कर पानी भरने की मांग कर रहे हैं और विभाग सुस्त दिखाई दे रहा है। भोले साहू ने बताया कि किसान सेवा समिति के अध्यक्ष भागवत साहू से कहकर शीघ्र जल संसाधन विभाग में आवेदन प्रस्तुत करेंगे यदि इसके बाद भी नहीं रूका तो आंदोलन का सहारा लेने की जरूरत होगी तो वह भी करेंगे।
गेट को खुला छोड़ने से बह रहा पानी
एनीकट के गेट खुला है। लगातार पानी बह रहा है। पिछली बार सही समय एनीकट लबालब था। जिसके कारण पानी का लेवल बना हुआ था इस बार तो इनकी ओर देखने वाला कोई नहीं है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। लोग तो जल संसाधन के इस उदासीनता को बहुत बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले 15 दिनों में नहाने के लिए एक बूंद भी पानी नहीं रह पाएगा। सरकार की करोड़ों रुपया एनीकट के गेट को खुला छोड़ने से फालतू हो गया है।
