राजेंद्र साहू मगरलोड
मगरलोड :- गरबा रास ,डांडिया, सुआ, बारहमासी गीत एवं छत्तीसगढ़ी लोकगीत का आयोजन नवरात्रि के चतुर्थ दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के परिधानों और वेशभूषा के साथ आकर्षक गरबा नृत्य किया गया। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ी परंपरा को आगे बढ़ावा देना है। इससे पहले प्रतिभागी हरा पीले रंग के वस्त्र में वेशभूषा में गरबा, डांडिया, सुआ बारहमासी छत्तीसगढ़ी लोकगीत किया गया जिसे परंपरागत महिलाओं द्वारा किया जाता है। आज जो उच्च ऊर्जा नृत्य का गठन हुआ है। उसे हम आज देख रहे हैं।आमतौर पर पुरुष और महिलाएं रंगीन वेशभूषा पहने हुए गरबा और डांडिया का प्रदर्शन करते हैं। लड़कियां घाघरा चोली पहनती है और साथ में विभिन्न प्रकार के आभूषण पहनती है। प्राचीन काल में लोग गरबा करते समय सिर्फ दो ताली बजाते थे लेकिन आज आधुनिक गरबा में नई तरह की समान का उपयोग होता है जिसमें नृत्यकार दो ताली बजा कर खेलते हैं। गरबा नृत्य सिर्फ नवरात्रि के त्यौहार में ही में किया जाता है।

माना जाता है कि गरबा करने से माता रानी प्रसन्न होता है महिलाएं और पुरुष रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर माता शक्ति के समक्ष नृत्य करती है गरबा के दौरान महिलाओं द्वारा तीन ताली भी बजाई जाती है। जो त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु ,और महेश को समर्पित मानी जाती है। राजीव युवा मितान क्लब के सदस्य डूमरपाली नारधा सरपंच गावेंद्र साहू,राजेंद्र साहू, चित्रसेन निषाद, होरीलाल साहू ,देवनारायण निषाद, राधे साहू, बेनुमति साहू ,डामिन साहू, गीतांजलि साहू ,जमुना साहू कौशल्या साहू ,धीरेखा निषाद, देवबती साहू, रीमन देवदास एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
